D P B S College, Anupshahr

Affiliated to CCS University, Meerut
NAAC Accredited Grade 'B' with CGPA 2.71
ISO 9001:2015 (QCC/E69A/0524) Certified College

डी पी बी एस कॉलेज, अनूपशहर

चौ० चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध
नैक से मान्यता प्राप्त ग्रेड 'बी', सीजीपीए 2.71
ISO 9001:2015 (QCC/E69A/0524) प्रमाणित कॉलेज
Ph.D. Admissions Open

Activities (2026-27)

15 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम एवं द्वितीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शपथ कार्यक्रम एवं तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने विद्यार्थियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय परिवार को राष्ट्र की एकता, अखंडता, संविधान एवं राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई। उपस्थित सभी सदस्यों ने देश के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी एवं समर्पण के साथ निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि “स्वतंत्रता दिवस हमें देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और बलिदानों का स्मरण कराता है। युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की प्रगति, एकता और अखंडता को मजबूत करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।” इसके पश्चात महाविद्यालय परिसर से तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ध्वज हाथों में लेकर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक रैली में सहभागिता की। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता से संबंधित नारों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित शपथ एवं तिरंगा रैली विद्यार्थियों में देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय मूल्यों को अपने व्यवहार एवं जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय सेवा योजना द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि “तिरंगा हमारे राष्ट्र के गौरव, सम्मान और एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शपथ एवं तिरंगा रैली जैसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। विद्यार्थियों को स्वतंत्रता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।” कार्यक्रम में प्रो. आर. के. अग्रवाल, डॉ. सोहन आर्य, प्रो. पी. के. त्यागी, डॉ. लक्ष्मण कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। तिरंगा रैली के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह एवं देशभक्ति की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ तथा सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में "विभाजन विभीषिका स्मृति " दिवस के अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह के निर्देशन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा, संघर्ष एवं बलिदान को याद किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. राधा उपाध्याय ,श्री अनिल कुमार और इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. नरेश चन्द्र ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा उसके सामाजिक एवं मानवीय प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण श्री निमेश कुमार, नरेश चन्द्र आदि उपस्थित रहे एवं विद्यार्थियों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया अंत में विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता मे प्राचार्य प्रो. जीके सिंह ने भारतीय संस्कृति में मेहंदी का महत्व बताया। मेहंदी, जिसे हिना के नाम से भी जाना जाता है, सकारात्मक भावनाओं और सौभाग्य से जुड़ा एक पेस्ट है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि खास अवसरों पर हाथों में मेहंदी लगाना हमारी प्राचीन संस्कृति है। मेहंदी लगाना भारतीय संस्कृति में शुभ माना जाता है। मांगलिक अवसरों पर भी मेहंदी लगाने की परंपरा है क्योंकि यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विभाग प्रभारी डॉ. मोहिनी गुप्ता ने कहा कि प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलू को प्रोत्साहित करने के साथ साथ विद्यार्थियों में कौशल का विकास करना और उसकी विविधता को सम्मानित करना है। छात्राओं ने अपने हाथों पर मेहंदी की एक श्रृंखला के माध्यम से अपने कलात्मक डिजाइन प्रदर्शित किए जिसमे कुछ पुराने लेकिन कुछ डिजाइन अनोखे और ट्रेंडी थे। गृह विज्ञान की प्रवक्ता सृष्टि शर्मा ने कहा कि मेहंदी का उपयोग बालों, नाखूनों और कपड़ों को रंगने के लिए भी किया जा सकता है और यह एक पौधे से प्राप्त होती है जो एक गहरा और अस्थायी रंग प्रदान करती है।छात्राओं की मेहंदी को देखते हुए प्रोफेसर चंद्रावती ने बताया कि मेहंदी कई समृद्ध भावनाओं और मान्यताओं के साथ औषधीय जड़ी बूटियों के ज्ञान को एक साथ लाते हुए समृद्ध भारतीय संस्कृति को दर्शाती है। प्रतियोगिता निर्णायक मंडल के रूप में डॉ रेनू चौधरी एवं प्रोफेसर चंद्रावती ने उजाला बी ए द्वितीय वर्ष को प्रथम, माधुरी को द्वितीय एवं अंजली गौतम को तृतीय स्थान पर घोषित किया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम एवं द्वितीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ ‘सेल्फी विद तिरंगा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेल्फी लेकर देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा, “तिरंगा केवल हमारे देश का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण कराता है, जिनके संघर्ष के कारण हम स्वतंत्र भारत में जीवन जी रहे हैं। विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मूल्यों एवं संविधान के प्रति निष्ठावान रहते हुए देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देना चाहिए।” राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा, “हर घर तिरंगा अभियान विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना केवल उन्हें स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी है। राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।” राष्ट्रीय सेवा योजना द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा, “तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ‘सेल्फी विद तिरंगा’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान तथा स्वतंत्रता के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। आज की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।” कार्यक्रम में प्रो. आर. के. अग्रवाल, डॉ. सोहन आर्य, प्रो. पी. के. त्यागी, डॉ. लक्ष्मण कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने तथा राष्ट्रध्वज के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

दिनांक 13.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में वाणिज्य संकाय तथा भारत स्काउट एवं गाइड के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य 'तिरंगा यात्रा' का आयोजन किया गया। देशभक्ति के उत्साह और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत इस यात्रा में कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तिरंगा यात्रा का शुभारंभ प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह ने किया, जिसमें सिर पर तिरंगा टोपी धारण किए विद्यार्थी "भारत माता की जय", "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा" और "वंदे मातरम" के गगनभेदी नारों के साथ आगे बढ़े। पूरी यात्रा के दौरान डीपीबीएस कॉलेज देशभक्ति के रंगों में रंगा नजर आया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि "तिरंगा हमारे देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के दिलों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, एकता और नागरिक कर्तव्यों की भावना को प्रगाढ़ करने का एक माध्यम है। हर नागरिक को देश की अखंडता बनाए रखने के लिए संकल्पित होना चाहिए।" डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि "स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदानों की बदौलत आज हम आज़ाद फिज़ा में सांस ले रहे हैं। हमारी युवा पीढ़ी को उनके पदचिह्नों पर चलकर देश के विकास में अपना सक्रिय योगदान देना चाहिए।" डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि "भारत स्काउट एवं गाइड और युवाओं की यह पहल समाज में अनुशासन, देशभक्ति और भ्रातृत्व की भावना का संचार करती है। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखते हैं।" डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि "तिरंगा हमें विविधता में एकता की सीख देता है। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण के कार्यों में करना चाहिए।" डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व और ध्वज हमें हमारे दायित्वों की याद दिलाते हैं। युवाओं में देशप्रेम की यह ऊर्जा ही आने वाले समय में एक सशक्त और समृद्ध भारत की नींव रखेगी।" सफलतापूर्वक हुआ आयोजन: यात्रा के समापन पर प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए वाणिज्य संकाय के डा भुवनेश कुमार, डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी , भारत स्काउट एवं गाइड के प्रभारियों तथा सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम अनुशासन, उल्लास और राष्ट्रप्रेम की अनुपम छटा के साथ संपन्न हुआ।

दिनांक 07.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में पुस्तक विमोचन समारोह एवं राष्ट्रीय करघा दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुस्तक विमोचन समारोह में अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष श्रीमती कामिनी अग्रवाल द्वारा लिखित "English prose and Writing Skills" पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक विमोचन समारोह की मुख्य अतिथि डॉक्टर दिव्या वाला पाठक, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश, अमर सिंह कॉलेज लखावटी रहीं । । इस पुस्तक की लेखिका श्रीमती कामिनी अग्रवाल ने बताया के इस किताब को लिखने की प्रेरणा महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह जी से प्राप्त हुई। मैंने इस किताब में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लागू किए गए बीए प्रथम वर्ष के नए पाठ्यक्रम को पूर्णतया कवर किया है। इस किताब में थ्योरी के साथ-साथ बहुविकल्पीय प्रश्न भी दिए गए हैं जो कि विद्यार्थियों को परीक्षा में सहायता प्रदान करेंगे। इसके पश्चात कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ दिव्या बाला पाठक ने बताया की कामिनी अग्रवाल मेरी रिसर्च स्कॉलर हैं और इतना अच्छा काम कर रही हैं। मैं उसके लिए उन्हें शुभकामनाएं प्रदान करती हूं। अपने पुस्तक की विशेषता बताते हुए कहा कि इस पुस्तक में लेखिका ने पॉइंट टू पॉइंट पाठ्यक्रम पर अपना लेखन कार्य किया है। पुस्तक विमोचन समारोह में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने लेखिका श्रीमती कामिनी अग्रवाल को शुभकामनाएं देते हुए उनकी मेहनत की प्रशंसा की एवं पुस्तक के विषय में बताते हुए कहा कि लेखिका ने पुस्तक में अत्यंत सरल तरीके से विषयों को स्पष्ट किया है सभी विद्यार्थी इस पुस्तक को पढ़ें। इस कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर तरुण श्रीवास्तव ने किया। महाविद्यालय के द्वितीय कार्यक्रम राष्ट्रीय करघा दिवस कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉक्टर मोहनी गुप्ता द्वारा किया गया। डॉ मोहिनी गुप्ता ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के हथकरघा बुनकरों के कौशल को सम्मान देना और छात्राओं को इस दिवस से अवगत कराना है उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 अगस्त 2015 को पहली बार की थी। 2026 के 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का मुख्य फोकस "बुनकरों का सम्मान, परंपराओं का नवीनीकरण, क्षितिज का विस्तार" और 'Weaving Innovation' (हैंडलूम हैकाथॉन) जैसी पहलों पर है।गृह विज्ञान की अध्यापक सृष्टि शर्मा ने हथकरघा उद्योग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि कृषि के बाद यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह ने छात्राओं के ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों के प्रति सम्मान तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। इन कार्यक्रमों में महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर चंद्रावती प्रोफेसर आरके अग्रवाल डॉक्टर रेनू चौधरी आदि सभी सम्मानित प्राध्यापक उपस्थित रहे ।

7 अगस्त 2026: डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग में शनिवार को "बैंकिंग क्षेत्र में भविष्य, चुनौतियाँ और समाधान" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, आधुनिक तकनीकों और भविष्य में रोजगार के अवसरों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एक्सिस बैंक अनूपशहर के शाखा प्रबंधक चंचल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "आज का बैंकिंग क्षेत्र तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एआई (AI) और साइबर सुरक्षा जैसी नई तकनीकों के आने से जहाँ चुनौतियाँ बढ़ी हैं, वहीं युवाओं के लिए इसमें अपार संभावनाएँ भी बनी हैं। बैंकिंग में करियर बनाने के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ, निरंतर सीखने की इच्छा और डिजिटल कौशल का होना बेहद जरूरी है।" इसी क्रम में एक्सिस बैंक के कैशियर सुधीर कुमार सिंह ने बैंक की व्यावहारिक कार्यप्रणाली और वित्तीय लेनदेन की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में सुरक्षा और ग्राहकों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव और सुरक्षित बैंकिंग पद्धतियों के प्रति जागरूक होना चाहिए।" डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है, जो उनके पेशेवर जीवन में बेहद मददगार साबित होगा।

दिनांक 07.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत डिप्लोमा इन मेडिकल ड्रेसर और डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन दो कोर्स का उद्घाटन किया गया।

दिनांक 06 .08 .2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह की अध्यक्षता में अंग्रेजी विभाग द्वारा 'स्वयं (SWAYAM) पोर्टल' विषय पर एक जागरूकता एवं प्रशिक्षण व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष श्रीमती कामिनी अग्रवाल ने प्राध्यापकों को 'स्वयं' पोर्टल की उपयोगिता, संचालन प्रक्रिया तथा इसके माध्यम से उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी विषयगत दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ अतिरिक्त ज्ञान एवं कौशल भी अर्जित कर सकते हैं, जबकि शिक्षक अपने अध्यापन को अधिक प्रभावी और अद्यतन बना सकते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी प्राध्यापकों से 'स्वयं' पोर्टल का अधिकाधिक उपयोग करने तथा विद्यार्थियों को भी इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों का समुचित उपयोग विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और आत्मनिर्भरता को नई दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों ने भी 'स्वयं' पोर्टल के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी पहल बताया। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत डिप्लोमा इन मेडिकल ड्रेसर और डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन दो पाठ्यक्रमों का शुभारंभ एवं बैंकिंग समस्या समाधान विषय पर एक गोष्ठी का भी आयोजन हुआ।

5 अगस्त 2026: डी.पी.बी.एस. कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में वाणिज्य विभाग ने आज "व्यावहारिक जीवन में केंद्रीय माप का उपयोग" विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सांख्यिकी के व्यावहारिक महत्त्व और दैनिक जीवन में इसके अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सांख्यिकी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पी. के. त्यागी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रो. त्यागी ने कहा कि: "केंद्रीय प्रवृत्ति के माप (माध्य, माध्यिका और बहुलक) केवल किताबों और आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये हमारे दैनिक जीवन, व्यापारिक निर्णयों और आर्थिक नीतियों के निर्धारण में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं। सही आंकड़ों का सटीक विश्लेषण ही बेहतर प्रबंधन और निर्णय क्षमता का आधार बनता है।" कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. तरुण श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक समय में डेटा (Data) की समझ विद्यार्थियों के व्यावसायिक भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि सांख्यिकीय पद्धतियों का सही ज्ञान विद्यार्थियों को अनुसंधान और व्यापार के नए अवसरों को समझने में सक्षम बनाता है। डॉ. विशाल शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वाणिज्य के क्षेत्र में केंद्रीय मापों का उपयोग बाजार के रुझानों को समझने और वित्तीय जोखिमों को कम करने में सहायक होता है। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के डा भुवनेश कुमार, डा तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 04-08-26 को सांख्यिकी विभाग के तत्वावधान में "पी. सी. महालनोबिस का प्रमुख योगदान एवं उपादेयता" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने की।प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पी. सी. महालनोबिस ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना कर देश को एक सुदृढ़ सांख्यिकीय ढांचा दिया। देश के आर्थिक नियोजन और औद्योगिक विकास में उनके विचार आज भी मार्गदर्शक हैं। मुख्य वक्ता सांख्यिकी विभाग के रिटा. प्रोफेसर पी. के. त्यागी ने महालनोबिस के गणितीय सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 'महालनोबिस दूरी' (Mahalanobis Distance) और द्वितीय पंचवर्षीय योजना के उनके प्रसिद्ध मॉडल की चर्चा करते हुए बताया कि आधुनिक डेटा साइंस में उनके सिद्धांत कितने प्रासंगिक हैं। विभाग अध्यक्ष सांख्यिकी, प्रोफेसर चन्द्रावती ने सांख्यिकी की व्यावहारिक उपादेयता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़ों के बिना सही नीति निर्माण असंभव है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे श्री नरेंद्र रंजन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 03 अगस्त 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग द्वारा "वाणिज्य दिवस (Commerce Day)" का गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन करते हुए वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि वाणिज्य दिवस का उद्देश्य विद्यार्थियों में वाणिज्य शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, वित्तीय एवं व्यावसायिक समझ का विकास करना तथा उनमें नेतृत्व क्षमता, नवाचार, उद्यमिता और व्यावसायिक नैतिकता जैसे गुणों का संवर्धन करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक एवं डिजिटल युग में वाणिज्य शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे सहायक आचार्य डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि वाणिज्य शिक्षा विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, तार्किक चिंतन तथा प्रभावी निर्णय क्षमता का विकास करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन रखने तथा कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। सहायक आचार्य डॉ. राजीव गोयल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वाणिज्य शिक्षा रोजगार, उद्यमिता एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, अनुसंधान तथा व्यावसायिक अवसरों के प्रति सजग एवं जागरूक रहने का आह्वान किया। सहायक आचार्य डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा प्रभावी अभिव्यक्ति कौशल का विकास करती हैं और उन्हें व्यवहारिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। अकादमिक एसोसिएट किश्वर सैफी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वाणिज्य दिवस जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, विषय की गहन समझ विकसित करने तथा नवीन जानकारियाँ प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए वाणिज्य शिक्षा के महत्व, भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्यमिता, बैंकिंग, लेखांकन, कराधान, जीएसटी, डिजिटल वित्त तथा समसामयिक आर्थिक विषयों पर ज्ञानवर्धक गतिविधियों एवं संवाद का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय के प्रति अपनी गहरी रुचि, समझ एवं सीखने की प्रतिबद्धता का प्रभावशाली परिचय दिया। विद्यार्थी बॉबी, भूमिका शर्मा, आकाश, शना, गीतांजलि यादव, कुणाल, पूजा, काजल चौहान एवं नेहा सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विषय के प्रति उनकी रुचि बढ़ती है, नवीन जानकारियाँ प्राप्त होती हैं तथा आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की गई तथा वाणिज्य शिक्षा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के आर्थिक विकास में सार्थक एवं सकारात्मक योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

दिनांक 03. 08. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन में आज भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की जयंती श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान वैज्ञानिक के प्रेरणादायी व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित कराना तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की भावना एवं नवाचार के प्रति रुचि विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर डॉ. राधा उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि महान वैज्ञानिकों का जीवन हमें परिश्रम, अनुशासन, समर्पण तथा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। मुख्य वक्ता डॉ. यजवेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय भारतीय रसायन विज्ञान के जनक होने के साथ-साथ एक महान शिक्षाविद, वैज्ञानिक एवं समाजसेवी भी थे। उन्होंने स्वदेशी विज्ञान को नई दिशा प्रदान की तथा अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश के वैज्ञानिक विकास में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शोध, नवाचार एवं ज्ञानार्जन के प्रति सदैव समर्पित रहें तथा विज्ञान को मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाएं। इस अवसर पर डॉ. जी. के. बंसल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को अधिक सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बनाना है। डॉ. जागृति सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय का जीवन संघर्ष, सादगी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र समर्पण का अनुपम उदाहरण है। इस अवसर पर दीक्षा शर्मा, तनिष्का, आयुष, तनिष्क, मयंक, प्रवीन, दीपांशी, रोहित, रुकसार आदि सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे तथा उन्होंने कार्यक्रम का लाभ प्राप्त किया।

दिनांक 31. 07. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में हिंदी विभाग द्वारा हिंदी साहित्य के महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की वास्तविकताओं का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से किसान, श्रमिक, दलित, महिला तथा वंचित वर्ग की पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ अभिव्यक्त किया। डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर सामाजिक संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों तथा मानवीय दृष्टि को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की तथा प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

दिनांक 31.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में गणित विभाग के तत्वावधान में महान स्विस गणितज्ञ गैब्रियल क्रैमर (Gabriel Cramer) की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान गणितज्ञों के जीवन एवं उनके गणितीय योगदान से परिचित कराना तथा गणित के प्रति उनकी रुचि एवं शोध भावना को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गैब्रियल क्रैमर के जीवन, उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा गणित के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को क्रैमर नियम (Cramer's Rule) की अवधारणा, उसके सिद्धांत तथा रैखिक समीकरणों के हल में उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया गया। साथ ही आधुनिक विज्ञान, अभियांत्रिकी, कंप्यूटर विज्ञान तथा डेटा विश्लेषण में क्रैमर के योगदान की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का संयोजन गणित विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हरेंद्र कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को गैब्रियल क्रैमर के जीवन एवं गणितीय योगदान से परिचित कराते हुए बताया कि क्रैमर नियम (Cramer's Rule) रैखिक समीकरणों के हल की एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसका उपयोग गणित के साथ-साथ अभियांत्रिकी, भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान तथा डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को गणितीय अवधारणाओं को केवल सूत्रों तक सीमित न रखकर उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने तथा अनुसंधान के क्षेत्र में नवीन विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गणित विभाग के प्रोफेसर आर. के. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गैब्रियल क्रैमर के व्यक्तित्व, उनकी विद्वत्ता तथा गणित के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महान गणितज्ञों का जीवन हमें जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन एवं निरंतर अध्ययन की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे गणित को केवल एक विषय के रूप में न देखकर समस्या-समाधान की कला तथा वैज्ञानिक सोच के आधार के रूप में अपनाएँ, जिससे वे भविष्य में उत्कृष्ट शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकें। इस कार्यक्रम में , प्रोफेसर चंद्रावती, प्रोफेसर यजवेंद्र कुमार, प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे, सहित अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।

दिनांक 29.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में "साइबर सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बीसीए विभाग के अध्यक्ष पंकज गुप्ता रहे। उन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों और डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित इंटरनेट बैंकिंग, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा मजबूत पासवर्ड प्रबंधन के व्यावहारिक टिप्स दिए। व्याख्यान के दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. भुवनेश कुमार एवं डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता पंकज गुप्ता को महाविद्यालय का पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया की चुनौतियों के प्रति सतर्क और सक्षम बनाते हैं। आयोजन में वाणिज्य विभाग के डॉ भुवनेश कुमार, डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।

दिनांक 28.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के नेतृत्व में महाविद्यालय के प्रतिनिधि मंडल ने उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय के नव-नियुक्त निदेशक प्रोफेसर डॉ मोनिका सिंह से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें नवीन दायित्व ग्रहण करने पर पुष्पगुच्छ प्रदान करके हुए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा एवं गति प्राप्त होगी। भेंट के दौरान प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने महाविद्यालय से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण समस्याओं एवं आवश्यकताओं से निदेशक महोदय को अवगत कराया। उन्होंने महाविद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए रिक्त पदों पर नवीन नियुक्तियाँ किए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से संबंधित अनुदान (ग्रांट) एवं अन्य लंबित वित्तीय विषयों के शीघ्र एवं समुचित समाधान के संबंध में भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, विद्यार्थियों के हितों तथा संस्थान के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी निदेशक महोदय का ध्यान आकृष्ट कराया। निदेशक महोदय ने महाविद्यालय की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरतापूर्वक सुना तथा उनके यथोचित एवं सकारात्मक समाधान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रोफेसर पी.के. त्यागी एवं डॉ. दीक्षित कुमार भी उपस्थित रहे। दोनों शिक्षाविदों ने भी नव-नियुक्त निदेशक महोदय को नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं तथा उच्च शिक्षा के विकास एवं महाविद्यालयों से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह शिष्टाचार भेंट अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई। महाविद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि निदेशक महोदय के सहयोग एवं मार्गदर्शन से महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा तथा संस्थान के शैक्षणिक एवं आधारभूत विकास को नई गति प्राप्त होगी।

दिनांक 24 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों ने प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल निर्देशन में 'अग्रवाल वुड प्रोडक्ट्स' फैक्ट्री का शैक्षणिक व औद्योगिक भ्रमण किया। इस शैक्षणिक दौरे का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक औद्योगिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना था। फैक्ट्री आगमन पर 'अग्रवाल वुड प्रोडक्ट्स' के मालिक श्री सुनील गुप्ता व अनंत जिंदल ने छात्रों का स्वागत किया और अपनी कंपनी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी यह इकाई प्लाईवुड, ब्लॉक बोर्ड और फिल्म-फेस्ड प्लाईवुड के निर्माण में माहिर है। निर्माण प्रक्रिया को समझाते हुए श्री अनंत जिंदल ने बताया कि प्लाईवुड एक 'इंजीनियर्ड वुड' (Engineered Wood) है। इसे लकड़ी की पतली परतों—जिन्हें विनियर (Veneer) कहा जाता है—को आपस में चिपकाकर तैयार किया जाता है। प्लाईवुड को मजबूती और स्थायित्व देने के लिए विनियर की परतों को एक-दूसरे के विपरीत दिशा (अल्टरनेट ग्रेन डायरेक्शन) में रखा जाता है। उन्होंने प्लाईवुड निर्माण के प्रमुख चरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राचार्य प्रो०जी के सिंह ने छात्रों की शैक्षिक भ्रमण से होने वाले लाभ को बताया और इन गतिविधियों में बढ़ चढ़ का भाग लेना जरूरी बताया। वाणिज्य विभाग के आचार्य डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक भ्रमण से छात्रों को उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली और उत्पादन प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है, जो उनके शैक्षणिक व व्यावहारिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है। डॉ विशाल शर्मा ने कहा कि वाणिज्य विभाग इस प्रकार की व्यवहारिक गतिविधियों को अनिवार्य रूप से करता है। इस औद्योगिक दौरे में प्रो पी के त्यागी,डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मासदस्यों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 18 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के रसायन विज्ञान विभाग में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह के निर्देशन में विषय : "दैनिक जीवन की अदृश्य रीढ़: पॉलिमर" विषय पर एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा, महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज अमीनाबाद, लखनऊ ने छात्र छात्राओं को बताया कि पॉलिमर ऐसे विशाल अणु हैं, जो छोटे-छोटे अणुओं के आपस में जुड़ने से बनते हैं। उन्होंने कहा कि पॉलिमर आधुनिक जीवन की अदृश्य रीढ़ हैं क्योंकि घर में उपयोग होने वाले प्लास्टिक के बर्तन, पानी की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री, कपड़े, जूते, रबर, पेंट, चिपकने वाले पदार्थ, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, वाहन तथा चिकित्सा उपकरणों तक में पॉलिमरों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने प्राकृतिक पॉलिमरों जैसे सेल्यूलोज़, स्टार्च, रेशम, ऊन तथा कृत्रिम पॉलिमरों जैसे पॉलीएथिलीन, पीवीसी, नायलॉन और टेफ्लॉन के उदाहरण देकर उनके गुण एवं उपयोग समझाए। साथ ही उन्होंने बताया कि हल्के वजन, मजबूती, टिकाऊपन, लचीलापन तथा कम लागत के कारण पॉलिमरों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। अंत में उन्होंने प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से भी अवगत कराते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान एवं अनुसंधान के माध्यम से ऐसे नवीन पॉलिमरों के विकास में योगदान देने का आह्वान किया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बना सकें। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो चंद्रावती ने विद्यार्थियों को पॉलिमर के प्रमुख लाभ बताते हुए कहा कि ये हल्के एवं मजबूत होते हैं। जंग एवं रसायनों से प्रभावित नहीं होते।कम लागत में बड़े पैमाने पर बनाए जा सकते हैं। विभिन्न आकार एवं रंगों में आसानी से ढाले जा सकते हैं।विद्युत एवं ऊष्मा के अच्छे कुचालक होते हैं।चिकित्सा और औद्योगिक क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी हैं। लेकिन पॉलिमर से लाभ के साथ साथ इससे जुड़ी चुनौतियाँ भी है क्योंकि जहाँ पॉलिमर ने मानव जीवन को सरल बनाया है, वहीं इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं। जैसे प्लास्टिक कचरे का बढ़ना। जैव-अवक्रमण में अत्यधिक समय लगना। जल एवं भूमि प्रदूषण,समुद्री जीवों एवं वन्यजीवों को नुकसान एवं माइक्रोप्लास्टिक के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि। उन्होंने कहा कि भविष्य में सतत विकास के लिए आवश्यक है कि हम पॉलिमर का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें, उनके पुनर्चक्रण को बढ़ावा दें तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएँ। कार्यक्रम के इस अवसर पर प्रोफेसर आरके अग्रवाल, डॉ यजवेंद्र कुमार,डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ. जागृति सिंह, सुनील कुमार और रसायन विज्ञान के सभी छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 17 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा "Importance of Physical Education in Modern Era" (आधुनिक युग में शारीरिक शिक्षा का महत्व) विषय पर एक प्रेरणादायी अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में शारीरिक शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में डी एन कॉलेज गुलावटी के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. नवीन तोमर ने मुख्य वक्ता (Resource Person) के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों, मानसिक तनाव एवं शारीरिक निष्क्रियता के दौर में नियमित व्यायाम, खेलकूद और योग प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से खेलों में सक्रिय भागीदारी करने तथा अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सकारात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया। इसी क्रम में उन्होंने डायबिटीज से बचाव के विषय में भी सारगर्भित जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण भी है। शारीरिक शिक्षा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहनशीलता तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास करती है। कार्यक्रम का संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो सीमांत कुमार दुबे द्वारा किया गया। अंत में विभाग की ओर से मुख्य अतिथि का स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया तथा डॉ लक्ष्मण सिंह द्वारा उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में प्रो आर के अग्रवाल,प्रो चन्द्रावती, डॉ यजवेंद्र कुमार एवं महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे, जिन्होंने व्याख्यान से प्रेरणा प्राप्त की।

दिनांक 15.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में 41 यूपी बटालियन एनसीसी, बुलंदशहर की कमांडिंग ऑफिसर कर्नल प्रियदर्शिनी चौधरी के निर्देशन में विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर डी.पी.बी.एस. कॉलेज, अनूपशहर की राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) इकाई द्वारा युवाओं में कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर एनसीसी अधिकारी कैप्टन यजवेन्द्र कुमार ने "युवा कौशल एवं राष्ट्र निर्माण" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, प्रभावी संचार, टीम वर्क, समस्या समाधान एवं व्यवहारिक कौशल का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एनसीसी युवाओं को एक जिम्मेदार, अनुशासित एवं राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती है। कार्यक्रम में बीसीए विभागाध्यक्ष श्री पंकज गुप्ता ने डिजिटल कौशल, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा रोजगारोन्मुखी तकनीकी दक्षताओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप स्वयं को निरंतर अपडेट रखने एवं नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में डिजिटल कौशल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। कार्यक्रम के दौरान एनसीसी कैडेटों एवं विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व, संचार कौशल तथा रोजगारपरक दक्षताओं के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने अपने कौशलों का निरंतर विकास करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेटों एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अंत में सभी उपस्थित जनों ने विश्व युवा कौशल दिवस के उद्देश्य को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 15.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में हवन-पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय श्री दुर्गा प्रसाद जी एवं स्वर्गीय श्री बलजीत सिंह जी के चित्रों पर पुष्पार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने संस्थापकों के आदर्शों का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसमें महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने सहभागिता कर महाविद्यालय की निरंतर उन्नति, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा समाज के कल्याण की कामना क करते हुए आहुति प्रदान की। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि डीपीबीएस महाविद्यालय की स्थापना शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के उच्च आदर्शों को स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्थापकों के आदर्श, त्याग एवं दूरदर्शी सोच ही महाविद्यालय की प्रेरणा हैं तथा हम सभी का दायित्व है कि इन मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय प्रबंध समिति के आदरणीय श्री जयप्रकाश गौड़ जी ने अपने उद्बोधन में संस्थापकों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि डीपीबीएस महाविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अनुशासन, परिश्रम एवं समर्पण की भावना के साथ महाविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अपना योगदान दें।कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा महाविद्यालय की निरंतर प्रगति एवं राष्ट्र की समृद्धि की मंगलकामना के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री अजय गर्ग जी, उपाध्यक्ष श्री सुनील कुमार गुप्ता जी, संस्थापक सदस्य श्री सेवक चंद्र गुप्ता जी, श्रीमती नीना चतुर्वेदी, श्रीमती शशिबाला पंत आदि सम्मान्य अतिथि एवं महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

दिनांक 14.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर के संस्कृत विभाग द्वारा एक गरिमामय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के संरक्षण एवं निर्देशन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र, पूर्व अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ तथा आचार्य, संस्कृत विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और जीवन-दर्शन की आधारशिला है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत तथा अन्य शास्त्रीय ग्रंथों में निहित ज्ञान आज भी मानवता के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर इसे जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में संस्कृत के अध्ययन एवं शोध के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं और युवा पीढ़ी को इस दिशा में आगे बढ़कर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने कहा कि अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को विषय के विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनकी ज्ञान-दृष्टि व्यापक होती है। उन्होंने संस्कृत विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता का अकादमिक वातावरण उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल एवं सारगर्भित उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उपस्थित विद्यार्थियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणास्पद बताया। अंत में संस्कृत विभाग की ओर से मुख्य अतिथि का स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मण सिंह ने आभार ज्ञापित करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सोहन आर्य ने किया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

दिनांक 12.07.2026को उत्तर प्रदेश सरकार के "एक पेड़ माँ के नाम" बृहद् वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत डी.पी.बी.एस. महाविद्यालय, अनूपशहर में आज प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल निर्देशन में वृहद् स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर, मस्तराम घाट एवं अन्य निर्धारित स्थलों पर लगभग 1200 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन डॉ. यजवेन्द्र कुमार के मार्गदर्शन एवं देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभियान के अंतर्गत *आम, जामुन, अमरूद, सहजन तथा कंजी* सहित विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं पर्यावरण हितैषी पौधे लगाए गए। इन पौधों का उद्देश्य केवल हरित आवरण बढ़ाना ही नहीं, बल्कि जैव विविधता का संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण तथा भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर का सृजन भी है। इस अवसर पर डॉ. यजवेन्द्र कुमार ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मातृत्व के सम्मान, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का संदेश भी देता है। उन्होंने सभी से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। डॉ.चन्द्रावती प्रोफेसर रसायन विज्ञान ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब प्रत्येक पौधे का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से पौधों की नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। महाविद्यालय की तरफ से विद्यार्थियों को भी बहुत पौध दी गई तथा उसे अपने घर में लगाकर उसके संरक्षण करने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। सभी प्रतिभागियों ने इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी सुरक्षा का संकल्प व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर पी.के. त्यागी, प्रोफेसर आर.के. अग्रवाल, प्रोफेसर चंद्रावती, प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे, डॉ लक्ष्मण सिंह डॉक्टर पंकज गुप्ता, डॉक्टर भुवनेश कुमार आदि समस्त प्राध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने पूर्ण सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

दिनांक 11.07.2026 को डीपीबीएस कॉलेज अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में आज विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर वाणिज्य विभाग और भारत स्काउट गाइड के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने बढ़ती जनसंख्या के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के वाणिज्य विभाग के डॉ. भुवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा, "तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है। सीमित संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण बेरोजगारी, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। यदि हमें एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है, तो जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।" इसके पश्चात, डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा, "जनसंख्या वृद्धि केवल एक संख्यात्मक समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव संसाधन के प्रबंधन से है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी विशाल युवा आबादी को कुशल और शिक्षित बनाएं। यदि हम जनसंख्या को 'लायबिलिटी' (बोझ) के बजाय 'असेट' (पूंजी) में बदलने में सफल रहे, तो देश का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है।" कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ विशाल शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, "बढ़ती आबादी का सीधा असर हमारे पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। जल, जमीन और स्वच्छ हवा की कमी भविष्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है। विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य तभी सफल होगा जब समाज का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा वर्ग, छोटे परिवार के महत्व को समझेगा और जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएगा।" संगोष्ठी में वाणिज्य विभाग केडॉ भुवनेश कुमार , डा तरुण श्रीवास्तव, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी व अन्य समस्त प्राध्यापकों सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 09.07.2026 को डीपीएबीएस पीजी कॉलेज में आज 'सांख्यिकी में विद्यार्थियों की सफलता के सीक्रेट तथ्य और सुझाव' विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एनएएस कॉलेज, मेरठ के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विवेक त्यागी रहे।अपने संबोधन में प्रोफेसर विवेक त्यागी ने विद्यार्थियों को सांख्यिकी के गूढ़ सिद्धांतों को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक युग में कैरियर निर्माण का सबसे मजबूत स्तंभ है। उन्होंने डेटा एनालिसिस, रिसर्च और सरकारी क्षेत्रों में सांख्यिकी की बढ़ती मांग को रेखांकित करते हुए सफलता के कई व्यावहारिक टिप्स और सीक्रेट्स साझा किए। इस अवसर पर कॉलेज के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी.के. त्यागी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बौद्धिक व्याख्यान विद्यार्थियों के विषय के प्रति दृष्टिकोण को बदलते हैं और उनमें तार्किक क्षमता का विकास करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विषय में एकाग्रता और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी है।व्याख्यान में कॉलेज के समस्त प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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