D P B S College, Anupshahr

Affiliated to CCS University, Meerut
NAAC Accredited Grade 'B' with CGPA 2.71
ISO 9001:2015 (QCC/E69A/0524) Certified College

डी पी बी एस कॉलेज, अनूपशहर

चौ० चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध
नैक से मान्यता प्राप्त ग्रेड 'बी', सीजीपीए 2.71
ISO 9001:2015 (QCC/E69A/0524) प्रमाणित कॉलेज
Ph.D. Admissions Open

Activities (2026-27)

17 अक्टूबर 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग एवं भारत स्काउट और गाइड की रोवर/रेंजर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को छात्र-छात्राओं के लिए कोतवाली अनूपशहर का शैक्षिक भ्रमण आयोजित किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कानून-व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, महिला सुरक्षा तथा उत्तर प्रदेश सरकार के अभियान ‘मिशन शक्ति’ की कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था। कोतवाली परिसर पहुँचने पर पुलिस प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर कोतवाली अनूपशहर के प्रभारी निरीक्षक जय किशोर गौतम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस समाज की मित्र एवं रक्षक है। युवाओं को किसी भी आपात स्थिति में पुलिस से संपर्क करने में संकोच नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112, महिला सुरक्षा हेल्पलाइन 1090, महिला हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत हेतु 1930 के संबंध में जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने अपराध नियंत्रण, जनरल डायरी (जीडी) में प्रविष्टि तथा महिला हेल्प डेस्क की कार्यप्रणाली से भी विद्यार्थियों को अवगत कराया। वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि पुस्तकीय ज्ञान के साथ व्यावहारिक एवं सामाजिक ज्ञान भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं तथा उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं। भारत स्काउट एंड गाइड की रोवर/रेंजर इकाई के प्रभारी डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि स्काउटिंग का मूल आधार सेवा, अनुशासन एवं कर्तव्यनिष्ठा है। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का यह अवसर विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सतर्कता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करेगा। डॉ. राजीव गोयल ने साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा के नियमों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी अत्यंत आवश्यक है। डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि युवा शक्ति देश की प्रगति का आधार है। युवाओं को अपने अधिकारों, कर्तव्यों तथा कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे एक जागरूक, जिम्मेदार और सशक्त समाज के निर्माण में योगदान दे सकें। भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने महिला हेल्प डेस्क, साइबर सेल, मालखाना, हवालात तथा कंप्यूटर कक्ष का अवलोकन किया। उन्होंने पुलिस कर्मियों से संवाद कर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को समझा तथा अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिवार की ओर से प्रभारी निरीक्षक जय किशोर गौतम एवं समस्त पुलिस टीम के प्रति ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करने हेतु आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के शिक्षकगण, रोवर/रेंजर इकाई के प्रतिनिधि तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

दिनांक 17.10.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में स्टैटिक्स विभाग द्वारा विश्व सांख्यिकी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को सांख्यिकी के महत्व, डेटा के विश्लेषण तथा आधुनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में इसके बढ़ते उपयोग के प्रति जागरूक करना था। इस अवसर पर सांख्यिकी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर चंद्रावती ने विश्व सांख्यिकी दिवस मनाए जाने के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य समाज में सांख्यिकी के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विश्वसनीय आंकड़ों के संग्रह, विश्लेषण और उपयोग को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि सांख्यिकी केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और वैज्ञानिक समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान खोजने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आंकड़ों के आधार पर तथ्यों का सही आकलन किया जा सकता है और बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर पी.के. त्यागी ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान युग डेटा का युग है। आज शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, उद्योग, व्यापार, प्रशासन, विज्ञान और तकनीक सहित जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में डेटा का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में डेटा की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि AI प्रणालियों के प्रशिक्षण, विश्लेषण, पूर्वानुमान और निर्णय लेने की क्षमता के विकास में डेटा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें सांख्यिकी और डेटा विश्लेषण के ज्ञान को आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना चाहिए, क्योंकि भविष्य में इन कौशलों की उपयोगिता और अधिक बढ़ेगी। इस अवसर पर सांख्यिकी विभाग के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

16 अक्टूबर 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य संकाय एवं भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की रोवर-रेंजर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के आदरणीय प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह के कुशल निर्देशन में एक दिवसीय यातायात जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यातायात नियमों, सड़क सुरक्षा तथा सुरक्षित वाहन संचालन के प्रति जागरूक करना और उनमें जिम्मेदार नागरिक होने की भावना विकसित करना था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उपनिरीक्षक (एसआई) जब्बार खान ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि स्वयं तथा दूसरों के जीवन की रक्षा के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने दोपहिया वाहन चलाते समय गुणवत्तापूर्ण हेलमेट पहनने, चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने तथा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करने की अपील की। उन्होंने युवाओं को स्टंट ड्राइविंग से बचने और सड़क पर धैर्य एवं अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यातायात नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। नियमों की अनदेखी न केवल स्वयं के लिए, बल्कि दूसरों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। उन्होंने कहा कि एक अनुशासित समाज का निर्माण नागरिकों के जिम्मेदार व्यवहार से होता है और सड़क पर संयम, सावधानी तथा नियमों का पालन इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कार्यक्रम में प्राप्त जानकारी को अपने परिवार एवं समाज तक पहुँचाएँ और सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि सड़क पर की गई छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। उन्होंने यातायात संकेतों का पालन करने, सुरक्षित तरीके से ओवरटेक करने तथा पैदल यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखने पर बल दिया। डॉ. विशाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए धैर्य, सतर्कता और अनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को यातायात नियमों के पालन की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा के प्रति सजग रहने तथा यातायात नियमों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

15 अक्टूबर 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में बी. कॉम. प्रथम सेमेस्टर के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के स्वागत हेतु नवप्रवेश समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आपसी सौहार्द, सहयोग और अपनत्व की भावना विकसित करना रहा। प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि महाविद्यालय जीवन व्यक्तित्व निर्माण, ज्ञानार्जन और भविष्य की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण चरण है। विद्यार्थियों को अनुशासन, नियमितता और परिश्रम को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। प्रोफेसर चंद्रावती ने विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। प्रोफेसर पी. के. त्यागी ने कहा कि वाणिज्य शिक्षा रोजगार, व्यवसाय और आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि ऐसे आयोजन नवप्रवेशित एवं वरिष्ठ विद्यार्थियों के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करने में सहायक होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित कर अध्ययन के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय जीवन सीखने, अपनी प्रतिभा निखारने और भविष्य के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर है। विद्यार्थियों को अनुशासन एवं नियमित अध्ययन के साथ महाविद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेना चाहिए। इस अवसर पर प्रोफेसर ऋषि कुमार अग्रवाल, डॉ. राजीव गोयल, डॉ. विशाल शर्मा एवं किश्वर सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बी. कॉम. के सभी सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।

डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह की अध्यक्षता में बीसीए (बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशंस) विभाग द्वारा दीक्षारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन, उच्च शिक्षा के उद्देश्यों तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश केवल शिक्षा प्राप्त करने की शुरुआत नहीं, बल्कि अपने व्यक्तित्व, ज्ञान एवं कौशल को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, सकारात्मक सोच तथा निरंतर परिश्रम के माध्यम से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। रसायन विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर चंद्रावती ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अर्जित ज्ञान और संस्कार ही भविष्य की सफलता का आधार बनते हैं। बीसीए विभाग के अध्यक्ष श्री पंकज गुप्ता ने विद्यार्थियों को कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक संभावनाओं से परिचित कराया। उन्होंने तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, नवीन तकनीकों के प्रति जागरूकता तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करने पर बल दिया। भौतिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. यजवेंद्र कुमार ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, तार्किक क्षमता विकसित करने तथा जिज्ञासु बने रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में ज्ञान के साथ नवाचार और समस्या-समाधान की क्षमता भी अत्यंत आवश्यक है। श्री सचिन अग्रवाल ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा शिक्षा के प्रति समर्पण, सकारात्मक दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास को सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर ऋषि कुमार अग्रवाल श्री सत्य प्रकाश आदि प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

दिनांक 10/10/26 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में वाणिज्य एवं कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में ‘वित्तीय साक्षरता एवं निवेशक जागरूकता कार्यक्रम’ (शीर्षक: “तैयारी जीत की”) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के सभागार में मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता सेबी-स्मार्ट ट्रेनर (SEBI-SMART Trainer) सुश्री अर्चना शर्मा रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को वित्तीय व्यवहार के आत्म-निरीक्षण, वित्तीय दृष्टिकोण और अनुशासन विकसित करने के साथ-साथ समझदारी से निवेश और वित्तीय निर्णय लेने के गुण सिखाए। उन्होंने वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन घोटालों से बचाव के व्यावहारिक तरीके साझा करते हुए कहा कि “कमाई से आय होती है; सीखने से संपत्ति बनती है” और युवाओं को सही वित्तीय ज्ञान के साथ भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में वित्तीय साक्षरता हर युवा के लिए अत्यंत आवश्यक है। छात्र जीवन से ही बचत और सही जगह निवेश करने की आदत भविष्य को आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है।वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि वित्तीय अनुशासन ही किसी व्यक्ति और देश के आर्थिक विकास की नींव है। विद्यार्थियों को जोखिम प्रबंधन और निवेश के विभिन्न सुरक्षित विकल्पों की जानकारी होना समय की मांग है। कार्यक्रम संचालक डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक जीवन में वित्तीय निर्णयों के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना है ।संस्कृत विभाग से डॉ. सोहन आर्य ने भारतीय परंपरा और नैतिक मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में धन प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संयम और अनुशासन से अर्जित व संचित धन ही स्थायी समृद्धि प्रदान करता है।हिंदी विभाग से डॉ. आलोक तिवारी ने कहा कि वित्तीय साक्षरता जीवन की एक मौलिक जरूरत है। उन्होंने कहा कि सही ज्ञान ही सुरक्षा की सबसे बड़ी ढाल है, जिससे युवा पीढ़ी वित्तीय धोखाधड़ी से बच सकती है।इस अवसर पर कॉलेज के विभिन्न संकायों डॉ भुवनेश कुमार,डॉ तरुण श्रीवास्तव ,डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, डॉ आलोक तिवारी, डॉ सोहन आर्य, डॉ मोहिनी गुप्ता, डॉ नरेश शर्मा,और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से प्रश्न पूछकर अपनी वित्तीय जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

दिनांक 09.10. 2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में छात्र परिषद सत्र 2026-27 का शपथ ग्रहण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश छात्र महासभा के अध्यक्ष श्री शुभम राठी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने छात्र परिषद के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को उनके पद एवं कर्तव्यों की शपथ दिलाई। छात्र परिषद के पदाधिकारियों में अध्यक्ष पद पर तेजवीर सिंह (एम.ए. संस्कृत, द्वितीय वर्ष), उपाध्यक्ष पद पर आस्था शर्मा (बी.एस सी., तृतीय वर्ष), सचिव पद पर हिमांशी चौधरी (बी.सी.ए., तृतीय वर्ष), सह-सचिव पद पर आरती , कोषाध्यक्ष पद पर दिव्या (बी.एड., द्वितीय वर्ष) तथा प्रतिनिधि के रूप में वैभव भारद्वाज और सुंदर गिरि को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अतिरिक्त पुस्तकालय सचिव आयुष गौतम को जिम्मेदारी मिली। प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह ने सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि छात्र परिषद महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को गति देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सहयोग और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने पदाधिकारियों से छात्रहित में कार्य करने तथा महाविद्यालय की गरिमा बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि श्री शुभम राठी ने छात्र परिषद के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना चाहिए। छात्र परिषद को विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान, सकारात्मक संवाद और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने किया। उन्होंने छात्र परिषद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छात्र जीवन में प्राप्त नेतृत्व का अनुभव विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से आपसी सहयोग, निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा व्यक्त की। समारोह में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ यजवेंद्र कुमार, प्रो सीमांत कुमार दुबे, डॉ दीक्षित कुमार, डॉ भुवनेश कुमार, श्री पंकज गुप्ता एवम महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापकगण, शिक्षणेतर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन छात्र परिषद के पदाधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने के संकल्प के साथ हुआ।

दिनांक 08.10.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में साइंस फैकल्टी के तत्वावधान में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत एवं उनके महाविद्यालय जीवन के शुभारंभ के अवसर पर दीक्षारंभ एवं फ्रेशर्स पार्टी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया तथा विभिन्न सांस्कृतिक एवं मनोरंजक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आर्यन गौतम एवं अनंत अग्रवाल को मिस्टर फ्रेशर तथा हूमेरा मलिक तथा अंकिता शर्मा को मिस फ्रेशर चुना गया। विजेता विद्यार्थियों को महाविद्यालय परिवार की ओर से शुभकामनाएं एवं बधाई दी गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षारंभ कार्यक्रम विद्यार्थियों के महाविद्यालय जीवन की एक नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यार्थी महाविद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, संस्कार, रचनात्मकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी विकसित करें। उन्होंने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रोफेसर चंद्रावती ने अपने संबोधन में नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय जीवन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य निर्धारित करने तथा निरंतर परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और आपसी सौहार्द की भावना को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा गीत, नृत्य, परिचयात्मक गतिविधियों एवं विभिन्न मनोरंजक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। फ्रेशर्स पार्टी ने नवागंतुक विद्यार्थियों को वरिष्ठ विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार के साथ आत्मीयता से जुड़ने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर यजवेन्द्र कुमार ने किया। आपने विद्यार्थियों के समक्ष मुख्य प्रशास्ता होने के नाते अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला एवं सभी को महाविद्यालय के नियमों का पालन करने हेतु प्रेरित किया कार्यक्रम में साइंस फैकल्टी के प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह उत्साह एवं उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

दिनांक 07.10.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के तत्वावधान में आयोजित अंतरमहाविद्यालयीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता (पुरुष) 2026-27 के अंतर्गत प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में प्रतियोगिता के तीसरे दिन भी रोमांचक मुकाबले जारी रहे। महाविद्यालय परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय परिसर मेरठ सहित विश्वविद्यालय से संबद्ध चार महाविद्यालयों की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। प्रतियोगिता में एनसीपीई नोएडा, एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद, सीसीएसयू कैंपस मेरठ तथा एसबीएमटी कॉलेज बुलंदशहर की टीमें अपने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन कर रही हैं। तीसरे दिन हुए मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। दिन के पहले मुकाबले में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद ने एनसीपीई नोएडा को 25-14 एवं 27-25 से पराजित किया। वहीं दूसरे मुकाबले में सीसीएसयू कैंपस मेरठ ने एनसीपीई नोएडा को 25-17 एवं 25-22 से शिकस्त दी। इसके बाद हुए मुकाबले में सीसीएसयू कैंपस मेरठ ने एसबीएमटी कॉलेज बुलंदशहर को 25-20 एवं 26-24 से पराजित किया। एक अन्य रोमांचक मुकाबले में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद ने एसबीएमटी कॉलेज बुलंदशहर को 25-23 एवं 25-16 से हराकर मुकाबला अपने नाम किया। महिला वर्ग में एन सी पी ई कॉलेज नोएडा चैंपियन बनी तथा दूसरे स्थान पर एच एल एम कॉलेज गाजियाबाद की टीम रही। सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता एवं टीम भावना का विकास करते हैं। विश्वविद्यालय स्तर की ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और प्रतिस्पर्धात्मक भावना के साथ आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करती हैं। डॉ. यजवेंद्र कुमार ने कहा कि खेल प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित करती हैं। खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहिए तथा जीत और हार दोनों को समान भाव से स्वीकार करते हुए निरंतर आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय पर्यवेक्षक के रूप में मेरठ कॉलेज, मेरठ से प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार, एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद से डॉ. पवन कुमार तथा सीसीएसयू कैंपस के खेल विभाग से प्रोफेसर ओम पाल उपस्थित रहे। सभी पर्यवेक्षकों ने प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं एवं खेल संचालन का निरीक्षण किया। प्रतियोगिता के विभिन्न मुकाबलों में श्री पवन कुमार, श्री ऋषभ कुमार, डॉ. अनमोल सिरोही, श्री कौशल कुमार, श्री अमर सिंह राठौर, श्री चंद्रपाल उर्फ मोनू तथा श्री विक्रांत कुमार ने रेफरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने निष्पक्ष एवं कुशलतापूर्वक मुकाबलों का संचालन करते हुए प्रतियोगिता को सुचारु रूप से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक सदस्य श्री सेवक चंद गुप्ता ने भी उपस्थित रहकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों को खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रतियोगिता के समन्वयक प्रोफेसर सीमांत दुबे द्वारा किया गया। उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल केवल जीत और हार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन में अनुशासन, धैर्य, संघर्ष और सामूहिक प्रयास की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का आह्वान किया। प्रतियोगिता के दौरान महाविद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे और उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिता को लेकर महाविद्यालय परिसर में उत्साह एवं खेल भावना का वातावरण बना रहा।

दिनांक 05.10.2026 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ की अन्तर्महाविद्यालय वालीबाल प्रतियोगिता पुरुष/महिला 2026-27 का आयोजन डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में 5, 6 एवं 7 अक्टूबर 2026 को किया जा रहा है। प्रतियोगिता में एम.एम.एच. कॉलेज, गाजियाबाद, एच.एल.एम. कॉलेज, गाजियाबाद, एन.सी.पी.ई., नोएडा, सी.सी.एस. विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ तथा मेजबान डी.पी.बी.एस. कॉलेज, अनूपशहर की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं। प्रतियोगिता के प्रथम दिवस विशिष्ट अतिथि के रूप में अनूपशहर के उपजिलाधिकारी श्री अरूण कुमार वर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय पर्यवेक्षक प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार एवं प्रोफेसर पवन कुमार, सी.सी.एस. विश्वविद्यालय परिसर, मेरठ से डॉ. ओम पाल सिंह तथा एन.सी.पी.ई., नोएडा के चेयरमैन श्री सुशील राजपूत सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं तथा खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का आह्वान किया। प्रतियोगिता के समन्वयक प्रोफेसर सीमान्त दुबे ने सभी खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी खिलाड़ी अनुशासन एवं खेल भावना का परिचय देते हुए अपनी प्रतिभा का श्रेष्ठ प्रदर्शन करें। उन्होंने खिलाड़ियों से प्रतियोगिता के नियमों का पालन करने तथा आपसी सौहार्द एवं सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। प्रतियोगिता के प्रथम दिन नॉक आउट मैच में डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर एवं एच.एल.एम. कॉलेज, गाजियाबाद के मध्य पहला मुकाबला खेला गया, जिसमें एच.एल.एम. कॉलेज, गाजियाबाद की टीम विजयी रही। लीग मैच में एनसीपीई नोएडा और सीसीएसयू कैंपस के बीच मुकाबला खेला गया, जिसमें एनसीपीई टीम विजयी रही। अगला मैच एमएमएच कॉलेज और एचएलएम कॉलेज के बीच खेला गया, जिसमें एचएलएम कॉलेज विजयी रहा। अगला मैच एनसीपीई और एम एम एच कॉलेज के बीच खेला गया जिसमें एनसीपीई टीम जीती। प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में श्री पवन कुमार, श्री विक्रांत तेवतिया, श्री मोनू शर्मा एवं श्री अमर राठौर आदि ने अपनी भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन प्रतियोगिता के समन्वयक प्रोफेसर सीमान्त दुबे द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में बी.एड. प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित प्रशिक्षार्थियों के लिए दीक्षारंभ समारोह एवं प्रवेशोन्मुखी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों को महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन, सुविधाओं एवं बी.एड. पाठ्यक्रम से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह, छात्र कल्याण समिति एवं महिला संरक्षण समिति की समन्वयक प्रोफेसर चंद्रावती, प्रॉक्टर डॉ. यजवेंद्र कुमार, शिक्षक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, विभाग के शिक्षकगण तथा बी.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे। प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि बी.एड. केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार एवं संवेदनशील शिक्षक के निर्माण की प्रक्रिया है। उन्होंने प्रशिक्षार्थियों से नियमित अध्ययन, अनुशासन, समयबद्धता एवं महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षक बनने के लिए विषय-ज्ञान के साथ विद्यार्थियों को समझने, उनका मार्गदर्शन करने तथा शिक्षण-कौशल विकसित करने की आवश्यकता है। डॉ. सुनीता गौड़ ने प्रशिक्षार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति, पुस्तकालय एवं डिजिटल पुस्तकालय, जिम, खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, महाविद्यालय पत्रिका, प्राथमिक उपचार, सैनिटरी पैड मशीन, छायाप्रति एवं कॉलिंग जैसी सुविधाओं की जानकारी दी। बी.एड. प्राध्यापक श्री गुरूदत्त शर्मा ने पाठ्यक्रम एवं प्रश्नपत्र की संरचना से संबंधित जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम में प्रशिक्षार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। चारु भारद्वाज, दीया रावल, अंशु, जानवी वशिष्ठ, सुनैना जोशी, जोगिंदर सिंह, कुमकुम आदि ने प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बनाया। सर्वसम्मति से जोगेंद्र कुमार को मिस्टर फ्रेशर तथा दीया रावल को मिस फ्रेशर चुना गया। डॉ. वीरेंद्र कुमार एवं श्री पंकज प्रकाश ने प्रशिक्षार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, संवेदनशीलता, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन बी.एड. प्राध्यापक श्री देव स्वरूप गौतम ने किया। उन्होंने कहा कि दीक्षारंभ केवल नए सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि विद्यार्थी से शिक्षक बनने की नई यात्रा का प्रारंभ है। कार्यक्रम में शिक्षक शिक्षा विभाग के समस्त शिक्षकगण तथा बी.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 1 अक्टूबर 2026 को अर्थशास्त्र विभाग एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक ज्ञानवर्धक एवं रोचक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान, समसामयिक घटनाओं, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र तथा भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों के प्रति रुचि विकसित करना, उनकी तार्किक एवं विश्लेषणात्मक क्षमता को बढ़ाना तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि क्विज जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के ज्ञान का विस्तार होने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, तार्किक सोच एवं टीम भावना का भी विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, भारतीय अर्थव्यवस्था, सामान्य अध्ययन, समसामयिक घटनाओं एवं अन्य ज्ञानवर्धक विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे गए। विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का प्रदर्शन करते हुए प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं उत्साह का वातावरण बना रहा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रो. ऋषि अग्रवाल, प्रो. चन्द्रावती, डॉ. हिमांशु कुमार, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. हरेंद्र कुमार सहित अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन एवं संचालन में अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र विभाग के शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं उपस्थित प्राध्यापकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ-साथ सीखने, सोचने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया।

दिनांक 30.09.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह के निर्देशन में विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय प्रशासन के मध्य संवाद को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘कॉफी विद प्रिंसिपल’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी समस्याएँ, जिज्ञासाएँ एवं सुझाव सीधे महाविद्यालय के प्राचार्य के समक्ष रखने के लिए सहज एवं सकारात्मक मंच प्रदान करना रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने महाविद्यालय से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं अपने उपयोगी सुझावों को प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के समक्ष प्रस्तुत किया। प्राचार्य ने सभी विद्यार्थियों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना तथा उनके समाधान के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आश्वस्त किया कि उनकी जायज समस्याओं के समाधान के लिए महाविद्यालय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं एवं सुझावों को सुनना महाविद्यालय प्रशासन की प्राथमिकताओं में है। इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ महाविद्यालय के शैक्षिक वातावरण को और अधिक सकारात्मक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में सहायक होते हैं। इस कार्यक्रम के बाद महाविद्यालय में छात्र परिषद का चुनाव हुआ जिसमें तेजवीर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष आस्था शर्मा, सचिव हिमांशी चौधरी, सहसचिव भूमि वत्स, कोषाध्यक्ष दिव्या, पुस्तकालय सचिव आयुष गौतम, एवं छात्र प्रतिनिधि के रूप में वैभव भारद्वाज एवं सुंदर गिरि का सर्वसम्मति से चुनाव हुआ। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. यजवेन्द्र कुमार रहे। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग करने वाले सभी विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में डॉक्टर लक्ष्मण सिंह, डॉक्टर आलोक कुमार तिवारी, डॉक्टर भुवनेश कुमार, डॉक्टर सोहन आर्य ,डॉ दीक्षित कुमार, डॉ विशाल शर्मा, डॉ मोहिनी गुप्ता आदि प्राध्यापक उपस्थित रहे।

24 सितंबर 2026। डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में इतिहास विभाग के तत्वावधान में पूना पैक्ट के ऐतिहासिक एवं सामाजिक महत्व पर कार्यक्रम एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पूना पैक्ट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रमुख प्रावधानों एवं उसके महत्व को समझा। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के प्रभारी डॉ. नरेश चंद शर्मा ने कहा कि पूना पैक्ट भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न को प्रभावित किया।पूना पैक्ट के प्रमुख प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत पृथक निर्वाचक मंडल के स्थान पर संयुक्त निर्वाचक मंडल की व्यवस्था स्वीकार की गई तथा प्रांतीय विधानसभाओं में दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाई गई। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐतिहासिक घटनाओं को उनके सामाजिक एवं राजनीतिक संदर्भों के साथ समझने का आह्वान किया। इस अवसर पर चित्रकला विभाग के श्री नितिन कुमार ने कहा कि पूना पैक्ट को समझने के लिए तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों तथा डॉ. भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी के विचारों को समझना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को इतिहास के अध्ययन में घटनाओं के क्रम और ऐतिहासिक तथ्यों पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में बी.ए. प्रथम सेमेस्टर के छात्र दिव्य गौतम ने पूना पैक्ट पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1932 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित सांप्रदायिक निर्णय में दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान किया गया था। इसके विरोध में महात्मा गांधी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन प्रारंभ किया। इसके पश्चात डॉ. भीमराव आंबेडकर एवं अन्य नेताओं के बीच हुए समझौते के परिणामस्वरूप 24 सितंबर 1932 को पूना पैक्ट संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने पूना पैक्ट से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने तथ्यपरक उत्तर देकर विषय को स्पष्ट किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं को केवल परीक्षा की दृष्टि से नहीं, बल्कि उनके व्यापक सामाजिक एवं राजनीतिक संदर्भ में समझने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने विद्यार्थियों को ऐतिहासिक घटनाओं के अध्ययन में तथ्यों, घटनाक्रम और संदर्भों को समझने पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 23. 09. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर की एनसीसी इकाई द्वारा आज एनसीसी भर्ती प्रक्रिया का आयोजन किया गया। भर्ती प्रक्रिया 41 यू पी बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल लवलेश पंगाल के निर्देशन में संपन्न हुई। एनसीसी में प्रवेश के लिए महाविद्यालय के कुल 120 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया, जिनमें से विभिन्न चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 28 विद्यार्थियों का चयन किया गया। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें रनिंग, पुश-अप एवं चिन-अप जैसी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता एवं फिटनेस का परीक्षण किया गया। इसके पश्चात अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा आयोजित की गई तथा चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में साक्षात्कार लिया गया। सभी चरणों में विद्यार्थियों के शारीरिक सामर्थ्य, अनुशासन, सामान्य ज्ञान एवं एनसीसी के प्रति उनकी अभिरुचि का मूल्यांकन किया गया। पूरी भर्ती प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में कर्नल प्रिय दर्शन चौधरी ,कैप्टन यजवेंद्र कुमार, सूबेदार प्रह्लाद सिंह, हवलदार भूपेंद्र सिंह तथा जीसीआई (गर्ल्स कैडेट इंस्ट्रक्टर) सृष्टि अग्रवाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर कर्नल प्रिय दर्शन चौधरी ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि एनसीसी विद्यार्थियों में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, साहस, राष्ट्रसेवा की भावना एवं व्यक्तित्व विकास के गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने चयनित कैडेट्स को एनसीसी की गतिविधियों में सक्रिय रूप से प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया। एनसीसी भर्ती प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। चयनित 28 कैडेट्स ने एनसीसी के माध्यम से राष्ट्रसेवा एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प व्यक्त किया।

दिनांक 23. 09. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में भारत की पहली महान महिला रसायन वैज्ञानिक डॉ असीमा चटर्जी के जन्म दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो चंद्रावती ने असीमा चटर्जी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि असीमा चटर्जी का जन्म 23 सितंबर 1917 को बंगाल में हुआ था। उनके पिता इंद्र नारायण मुखर्जी एक डॉक्‍टर थे और वहीं इनकी माता कमला देवी थीं। यह एक मध्यमवर्गीय परिवार था, जिसमें उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। असीमा ने रसायन शास्त्र में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से स्नातक डिग्री पूरी की। इसके बाद असीमा चटर्जी ने राजाबाजार साइंस कॉलेज परिसर से कार्बनिक रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री और 1944 में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। असीमा चटर्जी विज्ञान में डॉक्टरेट हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला थी। उनका डॉक्टरेट रिसर्च पादप उत्पादों के रसायन विज्ञान और सिंथेटिक कार्बनिक रसायन पर केंद्रित था और इसके परिणामस्वरूप ऐंठन-रोधी, मलेरिया-रोधी और कीमोथेरेपी दवाएं विकसित की। उनके मेहनत से भारतीय मेडिसिन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया। उपलब्धि और सम्‍मान के विषय में जानकारी देते हुए कहा उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि असीमा चटर्जी ने अपने वैज्ञानिक कार्यों के लिए अनेक सम्मान प्राप्त किए जिनमें वुमन ऑफ द ईयर, सी वी रमन अवार्ड और शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड आदि के साथ साथ उन्हें 1975 में पदम् भूषण से नवाजा गया। उनके सम्मान में 23 सितंबर 2017 को सर्च इंजन गूगल ने चटर्जी के जन्म की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 24 घंटे का गूगल डूडल तैनात किया। इस तरह उन्होंने देश और विज्ञान के लिए अनेक उपयोगी कार्य किए और 2006 में 90 साल की उम्र में वह इस दुनिया से चली गईं। कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों एवं अतिथियों ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉ असीमा चटर्जी का जीवन हर युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके विचार हमें निरंतर आगे बढ़ने, सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा देते हैं। कार्यक्रम के इस अवसर पर प्रो आर के अग्रवाल, जी के बंसल, डॉ जागृति सिंह, डॉ मोहिनी गुप्ता और रसायन विज्ञान के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 19.09.2026 को महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में डीपीबीएस कॉलेज, एवं अमेहा सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में ‘अभिध्या DPBS पोर्टल’ का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री अमित बंसल, सीईओ, अमेहा सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान ‘अभिज्ञा DPBS’ पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल डीपीबीएस महाविद्यालय के पूर्व छात्र श्री अमित बंसल जी द्वारा डेवलप किया गया है। यह पोर्टल विद्यार्थियों को UPSC, NEET, JEE आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक शैक्षणिक सामग्री एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के सहयोग से अध्ययन की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। मुख्य अतिथि श्री अमित बंसल ने पोर्टल का प्रयोग प्रयोगात्मक तरीके से सिखाते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तक सुगम पहुंच प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ‘अभिध्या DPBS’ विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक उपयोगी डिजिटल माध्यम है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह ने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के हित में महाविद्यालय के पूर्व छात्र श्री अमित बंसल द्वारा डेवलप किए गए इस पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक एवं डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों से जोड़ने में सहायता मिलेगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. लक्ष्मण सिंह ने किया कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, अमेहा सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी कंपनी से श्रीमती नेहा गुप्ता, द्राक्षी वार्ष्णेय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

डीपीबीएस कॉलेज में दिनांक 17 सितंबर 2026 को हैदराबाद मुक्ति दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को हैदराबाद मुक्ति आंदोलन के ऐतिहासिक महत्व, स्वतंत्रता के पश्चात हैदराबाद के भारतीय संघ में एकीकरण तथा इस ऐतिहासिक घटना से जुड़े प्रमुख पहलुओं से अवगत कराना था। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य श्री जी. के. सिंह जी के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. नरेश चंद शर्मा, श्री नितिन शर्मा एवं श्री नितिन कुमार सहित अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. नरेश चंद शर्मा ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने हैदराबाद के भारतीय संघ में विलय से संबंधित ऐतिहासिक परिस्थितियों तथा स्वतंत्र भारत के निर्माण में इस घटना की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त श्री नितिन शर्मा ने भी अपने व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को हैदराबाद मुक्ति दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं उसके विभिन्न महत्वपूर्ण पक्षों से परिचित कराया। उन्होंने विद्यार्थियों को इतिहास की घटनाओं को केवल तिथियों के रूप में न देखकर उनके सामाजिक, राजनीतिक एवं राष्ट्रीय संदर्भ में समझने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली। बी ए प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी दिव्य गौतम ने हैदराबाद मुक्ति दिवस के विषय पर एक सारगर्भित प्रस्तुतीकरण (Presentation) प्रस्तुत किया तथा विषय से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों एवं घटनाक्रम की जानकारी विद्यार्थियों के समक्ष रखी। उनके प्रस्तुतीकरण ने कार्यक्रम को और अधिक ज्ञानवर्धक एवं संवादात्मक बनाया। कार्यक्रम के दौरान प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों के अध्ययन के साथ-साथ देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महत्व को समझने का संदेश दिया। अंत में कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में ऐतिहासिक चेतना, राष्ट्रीय एकता एवं देश के इतिहास के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दिनाँक 16.09.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रो जी.के. सिंह के निर्देशन में रसायन विभाग एवं भौतिक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्व ओजोन दिवस" के अवसर पर एक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो चंद्रावती ने कहा कि आज हम विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर एक ऐसे विषय पर चर्चा कर रहे हैं, जिसका संबंध केवल रसायन विज्ञान से नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण, स्वास्थ्य और पृथ्वी पर जीवन से है। उन्होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि सूर्य हमारे लिए प्रकाश और ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। लेकिन सूर्य से आने वाली कुछ किरणें ऐसी भी होती हैं, जो जीव-जगत के लिए हानिकारक हो सकती हैं। भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ यजवेन्द्र कुमार ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ओजोन परत को हानि पहुंचाने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने में ओजोन परत की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी कारण ओजोन परत को हम पृथ्वी का सुरक्षा कवच भी कह सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को ओजोन क्षरण: कारण, प्रभाव और रोकथाम पर विस्तार से बताया कि ओजोन ऑक्सीजन का एक विशेष रूप है। यह वायुमंडल के समताप मंडल में लगभग 15 से 35 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थित है और यहीं ओजोन की अधिक मात्रा पाई जाती है। यही ओजोन परत है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों, विशेष रूप से पराबैंगनी-बी तथा पराबैंगनी-सी किरणों को काफी मात्रा में अवशोषित करती है। ओजोन का निर्माण,क्षरण,क्षरण की रासायनिक प्रक्रिया, क्षरण के प्रभाव पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा उन्होंने कहा कि इसके क्षरण से मनुष्य में त्वचा कैंसर, आँखो में मोतिया बिंद की समस्या आदि रोग एवं प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। जलीय जीवों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। जलीय पारिस्थितिकी पर ही नहीं बल्कि इसका प्रभाव सम्पूर्ण जीव-जगत और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र भी होता है। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र छात्राओं में से एमएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा शिखा गौड़ ने ओजोन को नुकसान पहुँचाने वाले रासायनिक पदार्थों की जानकारी देते हुए कहा कि ओजोन परत की रक्षा करना केवल वैज्ञानिकों या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हम सभी को भी हम सभी को ऐसे ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों का उपयोग कम करना चाहिए तथा पर्यावरण के अनुकूल और ओजोन के लिए सुरक्षित विकल्पों को अपनाना चाहिए। बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा आस्था शर्मा ने भी ओजोन संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले उपायों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओजोन परत की रक्षा के लिए वर्ष 1987 में मॉन्ट्रियल समझौता अपनाया गया। जिसका उद्देश्य ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और उपयोग को नियंत्रित करना था। कार्यक्रम के अंत में रसायन विज्ञान के प्राध्यापक डॉ जी के बंसल ने कहा कि ओजोन परत की हमारे जीवन की सुरक्षा में भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ओजोन परत हमें दिखाई नहीं देती, लेकिन रसायन विज्ञान हमें यह समझने में सहायता करता है कि ओजोन कैसे बनती है, किस प्रकार उसका विघटन होता है और कुछ रासायनिक पदार्थ उसके विनाश को कैसे बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमें जीवन देती है और बदले में केवल संरक्षण चाहती है। आज का हमारा छोटा-सा संकल्प, कल की पूरी मानवता की सुरक्षा बन सकता है। हम सभी मिलकर ओजोन संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी बनाएँ। कार्यक्रम के इस अवसर पर प्रो आरके अग्रवाल, प्रो सीमान्त दुबे, डॉ जागृति सिंह, डॉ मोहिनी गुप्ता, और रसायन विज्ञान के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 14 सितंबर 2026 को डीपीबीएस कॉलेज में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में हिंदी विभाग एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस बड़े उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, सम्मान तथा हिंदी साहित्य के सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने हिंदी भाषा एवं साहित्य की महत्ता पर व्याख्यान देते हुए कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा हिंदी साहित्य के अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर शिक्षा संकाय की डॉ. सुनीता गौड़ ने भी अपने विचार एवं व्याख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने भाषा, शिक्षा और समाज के परस्पर संबंधों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को हिंदी के समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप से परिचित कराया। कार्यक्रम के अंतर्गत समाजशास्त्र विभाग द्वारा “साहित्य समाज का दर्पण है” विषय पर निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने विषय पर अपने विचारों को रचनात्मक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं उसके गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में प्रो सीमांत कुमार दुबे, डॉ. लक्ष्मण सिंह, डॉ अनिल कुमार,डॉ हिमांशु कुमार व महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 09 सितंबर 2026 को डीपीबीएस कॉलेज के सांख्यिकी विभाग में प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् प्रोफेसर सीआर राव के जन्मोत्सव के उपलक्ष में एक भव्य अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं सांख्यिकी विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर चंद्रावती के सफल नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में सांख्यिकी विभाग के सीनियर प्रोफेसर पीके त्यागी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में प्रोफेसर सीआर राव के सांख्यिकीय सिद्धांतों और देश के विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रोफेसर त्यागी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युग में सांख्यिकी का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है और प्रोफेसर सीआर राव के विचार आज भी शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक हैं। प्रोफेसर चंद्रावती ने अपने संबोधन में कहा कि सांख्यिकी न केवल शैक्षणिक अनुसंधान बल्कि देश के आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण की भी रीढ़ है। प्रोफेसर चंद्रावती ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और युवाओं से प्रोफेसर सीआर राव के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कॉलेज के अन्य प्राध्यापक और सांख्यिकी विभाग के एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मंच का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभाग के श्री नरेन्द्र रंजन के द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर ऋषि अग्रवाल डॉक्टर लक्ष्मण सिंह इत्यादि प्राध्यापक उपस्थित रहे

दिनांक 09.09.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रो जी.के सिंह के निर्देशन में भौतिकी विभाग द्वारा विश्व इलेक्ट्रिकल वाहन दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिता एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रिकल वाहनों की उपयोगिता, पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका तथा भविष्य की सतत परिवहन व्यवस्था के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. यजवेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिकल वाहन वर्तमान समय में स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प हैं। उन्होंने बताया कि पेट्रोल एवं डीजल से चलने वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण एवं जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने में सहायता मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को इलेक्ट्रिकल वाहनों के पीछे कार्य करने वाली वैज्ञानिक एवं भौतिकीय अवधारणाओं से भी अवगत कराया। डॉ. यजवेन्द्र कुमार ने कहा कि “इलेक्ट्रिक वाहन केवल परिवहन का आधुनिक साधन नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण और ऊर्जा के बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। युवाओं को नई तकनीकों को समझने के साथ-साथ उनके पर्यावरणीय महत्व को भी जानना चाहिए।” साथ ही उपस्थित विद्यार्थियों के मध्य इसी विषय पर क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने इलेक्ट्रिकल व्हीकल के बारे में अपने ज्ञान को क्विज प्रतियोगिता के आधार पर जांचा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभ, बैटरी तकनीक, ऊर्जा संरक्षण तथा पर्यावरणीय प्रभाव से संबंधित विषयों पर जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा। इस अवसर पर भौतिकी विभाग के समस्त प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 7 सितंबर 2026 को डी.पी.बी.एस. महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में गृह विज्ञान विभाग द्वारा राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अंतर्गत फायरलेस कुकिंग प्रतियोगिता एवं समापन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं समाज में संतुलित आहार, पोषण, स्वास्थ्य तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोहिनी गुप्ता ने राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों में संतुलित आहार, पोषण एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया। इसी क्रम में फायरलेस कुकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसमें छात्राओं ने बिना अग्नि के पौष्टिक, स्वादिष्ट एवं आकर्षक व्यंजन तैयार किये। प्रतियोगिता में व्यंजनों का मूल्यांकन पोषण मूल्य, स्वच्छता, रचनात्मकता, स्वाद एवं प्रस्तुतीकरण के आधार पर किया जाएगा।इस अवसर पर प्रो. आर.के. अग्रवाल, प्रो. चंद्रावती एवं प्रो यजवेन्द्र कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहें। निर्णायकों ने पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम आशिफा एवं द्वितीय चेतना कुमारी को और बिना आग कुकिंग प्रतियोगिता में गुंजन को प्रथम, द्वितीय अंजली तथा तृतीय स्थान रवीना को प्रदान किया। प्रतियोगिता के पश्चात राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के समापन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में सप्ताह भर आयोजित विभिन्न गतिविधियों के प्रतिभागियों एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सृष्टि शर्मा द्वारा सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया।

5 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर दुर्गा प्रसाद बलजीत सिंह (डीपीबीएस) कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह की अध्यक्षता में महाविद्यालय के प्रबंध तंत्र द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकों को उनके शैक्षिक एवं सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के क्रम में फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा एवं अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सहयोग से महाविद्यालय परिसर में निःशुल्क हेल्थ चेक-अप एवं स्वास्थ्य जागरूकता कैंप का आयोजन भी किया गया। शिविर का उद्देश्य शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक परामर्श एवं जाँच की सुविधा उपलब्ध कराना रहा। स्वास्थ्य शिविर में फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा के सीनियर डायरेक्टर एवं HOD, कार्डियोलॉजी डॉ. संजीव गेरा तथा एडिशनल डायरेक्टर, ऑन्कोलॉजी डॉ. ज्योति आनंद द्वारा स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी एवं चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। शिविर में निःशुल्क हेल्थ चेक-अप, सामान्य स्वास्थ्य परामर्श, ECG स्क्रीनिंग तथा स्तन कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस अवसर पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के जिला अध्यक्ष श्री हरि प्रकाश सिंह, संगठन सचिव श्री बलविंदर सिंह, तहसील अध्यक्ष श्री बलविंदर सिंह तथा कोषाध्यक्ष श्री ब्रह्मपाल सिंह सहित अन्य पूर्व सैनिक उपस्थित रहे। पूर्व सैनिक सेवा परिषद के पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य जागरूकता के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता एवं चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का सम्मान उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उन्होंने स्वास्थ्य शिविर को शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं समाज के स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इसी क्रम में अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद द्वारा भी शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। महाविद्यालय प्रशासन ने फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा एवं अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

दिनांक 02.09.2026 को डी.बी.पी.एस. महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर गृह विज्ञान विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में महाविद्यालय परिसर में पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता एवं अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली, पोषण का महत्व, कुपोषण की रोकथाम एवं स्वास्थ्य जागरूकता जैसे विषयों पर आकर्षक और संदेशपरक पोस्टर बनाए। गृह विज्ञान की विभाग अध्यक्ष डॉक्टर मोहिनी गुप्ता ने बताया कि छात्राओं ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से समाज में पोषण के प्रति जागरूकता का प्रभावी संदेश दिया है। कार्यक्रम में प्रो. चंद्रावती, विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग ने अतिथि व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने पोषण के वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए संतुलित आहार एवं आवश्यक पोषक तत्वों की भूमिका के बारे में छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल पर्याप्त भोजन ही नहीं, बल्कि पौष्टिक एवं संतुलित भोजन का सेवन भी आवश्यक है। कार्यक्रम में छात्राओं की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। पोस्टर प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने के साथ-साथ पोषण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। महाविद्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में “सही पोषण—स्वस्थ जीवन” की भावना विकसित करना तथा पोषण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ जागृति सिंह, डॉ राधा उपाध्याय, सृष्टि शर्मा एवं छात्राएं उपस्थित रही।

2 सितंबर 2026। डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन में शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा बी.एड. द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बी.एड. द्वितीय वर्ष के संपूर्ण सत्र से संबंधित महत्वपूर्ण शैक्षणिक, विभागीय एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम में बी.एड. द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. सुनीता गौड़ ने कहा कि द्वितीय वर्ष का पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ प्रदान करने के साथ-साथ एक कुशल एवं उत्तरदायी शिक्षक के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सभी विषयों की नियमित तैयारी, कक्षा में सक्रिय सहभागिता तथा निर्धारित शैक्षणिक कार्यों को समय पर पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया। इंटर्नशिप के संबंध में बीएड विभाग के प्राध्यापक श्री गुरुदत्त शर्मा ने विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इंटर्नशिप बी.एड. प्रशिक्षण का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इसके माध्यम से विद्यार्थी विद्यालयी वातावरण, शिक्षण प्रक्रिया, कक्षा-प्रबंधन तथा विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं को प्रत्यक्ष रूप से समझते हैं। उन्होंने इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों द्वारा किए जाने वाले विभिन्न कार्यों, विद्यालय में अनुशासन तथा आवश्यक अभिलेखों के संधारण के संबंध में भी जानकारी प्रदान की। व्यवसायिक दक्षता संवर्धन हेतु बीएड विभाग के प्राध्यापक श्री देव स्वरूप गौतम ने कहा कि बी.एड. प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यावहारिक, रचनात्मक एवं व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष बल देता है। व्यवसायिक दक्षता संवर्धन हेतु लागू सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी की समझ, स्काउट एवं गाइड एवं सामुदायिक सहभागिता की गतिविधियों के महत्व को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को इनसे संबंधित कार्यों को गंभीरता एवं रचनात्मकता के साथ पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान समय में शिक्षक के लिए डिजिटल तकनीक का ज्ञान और उसका प्रभावी शैक्षिक उपयोग अत्यंत आवश्यक है। पूरे सत्र के दौरान तैयार की जाने वाली विभिन्न सत्रीय कार्यों के संबंध में बीएड विभाग के प्राध्यापक श्री पंकज प्रकाश ने विद्यार्थियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने बताया कि सत्रीय कार्य विद्यार्थियों के सतत् मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अतः सभी प्रशिक्षु सत्रीय कार्य को निर्धारित प्रारूप के अनुसार व्यवस्थित, स्वच्छ एवं समयबद्ध तरीके से तैयार करें तथा संबंधित शिक्षक से समय-समय पर उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते रहें। विभागाध्यक्षडॉ शैलेंद्र कुमार सिंह ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली पर मार्गदर्शन करते हुए प्रश्न पत्र का पैटर्न, अंक विभाजन एवं आंतरिक अंक एवं आंतरिक परीक्षाओं के बारे में विस्तृत रूप से बताया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक श्री देव स्वरूप गौतम ने किया। इस अवसर पर बी.एड. द्वितीय वर्ष के सभी छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

दिनांक 01-09- 2026 को डीपीबीएस कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह समारोह का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने उद्बोधन में प्राचार्य जी.के. सिंह ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों की जननी है। आधुनिक युग में भी इसकी प्रासंगिकता उतनी ही मजबूत है। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह ने सप्ताह भर चली विभिन्न प्रतियोगिताओं की आख्या प्रस्तुत की। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं से इस देववाणी के संरक्षण और दैनिक जीवन में इसके महत्व को अपनाने का आह्वान किया। समारोह के अंतिम चरण में, पूरे सप्ताह आयोजित हुईं श्लोक अंत्याक्षरी, निबंध लेखन और भाषण प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को मुख्य अतिथियों द्वारा प्रमाण पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए। इस दौरान प्रोफेसर ऋषि कुमार अग्रवाल, प्रोफेसर चन्द्रावती, डॉ हिमांशु कुमार इत्यादि भारी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 29.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा महान हॉकी खिलाड़ी एवं खेल जगत के प्रेरणास्रोत मेजर ध्यानचंद जी की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर छात्र एवं छात्रा वर्ग में 800 मीटर दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छात्र वर्ग की प्रतियोगिता में प्रवीण (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान, कुलदीप (बी.ए. तृतीय वर्ष) ने द्वितीय स्थान तथा कपिल (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार छात्रा वर्ग में काजल (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान, कुमकुम (बी.ए. तृतीय वर्ष) ने द्वितीय स्थान तथा दीपांशी (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. सीमांत कुमार दुबे द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को खेलों के महत्व, अनुशासन, नियमित व्यायाम तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और टीम भावना का भी विकास करते हैं। इस अवसर पर प्रोफेसर चंद्रावती ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन युवाओं के लिए परिश्रम, समर्पण और राष्ट्र के प्रति गौरव की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से खेलों को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों दीपांशी व कुलदीप ने भी मेजर ध्यानचंद जी के बारे में अपने विचार रखे। इस अवसर पर सत्र 2025-26 में अंतरमहाविद्यालयी प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। इस कार्यक्रम में प्रो आर के अग्रवाल,डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ आलोक कुमार तिवारी व श्री हिमांक कुमार इत्यादि प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 25.08.2026 को महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह के निर्देशन में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं की श्रृंखला के अंतर्गत कंचा खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए अपनी खेल प्रतिभा एवं कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के बालक वर्ग में शिवम ने प्रथम, पुष्पित ने द्वितीय तथा उदित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं बालिका वर्ग में कंचन ने प्रथम, सपना ने द्वितीय तथा अंशिता ने ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे ने कहा कि “पारंपरिक खेल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कंचा जैसे पारंपरिक खेल विद्यार्थियों में एकाग्रता, धैर्य, लक्ष्य-निर्धारण एवं प्रतिस्पर्धात्मक भावना का विकास करते हैं। आधुनिक खेलों के साथ-साथ पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना भी आवश्यक है, ताकि विद्यार्थी अपनी संस्कृति और खेल परंपराओं से जुड़े रहें।” उन्होंने प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि खेलों में जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण अनुशासन, सहभागिता और खेल भावना है। महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने पारंपरिक खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों को ऐसी गतिविधियों में अनिवार्य रूप से भाग लेते हुए व्यक्तित्व का निर्माण करना चाहिए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में शारीरिक शिक्षा विभाग के श्री हिमांक चौधरी का विशेष योगदान रहा । कार्यक्रम के अंत में विजेता विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दी गईं तथा सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

दिनांक 25.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत सप्ताह महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को उद्घाटन समारोह एवं संस्कृत सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि संस्कृत डॉ. देवेंद्र पांड्या, क्षेत्र संगठन मंत्री, संस्कृत भारती तथा महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र पांड्या ने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा ही नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और जीवन-मूल्यों की आधारभूत भाषा है। संस्कृत के अध्ययन से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत को केवल विषय के रूप में न पढ़कर दैनिक जीवन में भी संस्कृत के सरल वाक्यों का प्रयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाने के लिए संस्कृत संभाषण एवं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियाँ अत्यंत उपयोगी हैं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की आत्मा है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन में शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संस्कृत सप्ताह जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें रचनात्मकता एवं आत्मविश्वास का विकास करते हैं। उन्होंने संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को अधिक से अधिक संख्या में संस्कृत संबंधी गतिविधियों में सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मण सिंह ने बताया कि संस्कृत विभाग द्वारा संस्कृत सप्ताह महोत्सव दिनांक 25.8.2026 से 31.8.2026 तक संचालित होगा, जिसके अंतर्गत श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता, गीत गायन प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आदि विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर संस्कृत विभाग द्वारा सुलेख प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने संस्कृत श्लोकों एवं सूक्तियों का सुंदर एवं आकर्षक लेखन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति विशेष उत्साह देखने को मिला। संस्कृत विभाग में कार्यरत प्राध्यापक एवं कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ सोहन आर्य ने संस्कृत विभाग की ओर से अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 24.08.2026 को डी.पी.बी.एस. महाविद्यालय, अनूपशहर में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में भौतिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में विविध शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा उत्पन्न करना रहा। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए क्विज प्रतियोगिता सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों के अंतरिक्ष विज्ञान, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम एवं वैज्ञानिक उपलब्धियों से संबंधित ज्ञान को परखा गया तथा उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित की गई। कार्यक्रम में भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. यजवेंद्र कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि “अंतरिक्ष विज्ञान केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में जिज्ञासा, अनुसंधान की प्रवृत्ति और नवीन सोच को विकसित करने का सशक्त माध्यम है। भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं और आज के विद्यार्थी ही भविष्य में इन उपलब्धियों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाले वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता बनेंगे।” उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा एवं ज्ञान का प्रदर्शन किया। आयोजन ने विद्यार्थियों को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों से परिचित कराने के साथ-साथ विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति प्रेरित करने का कार्य किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में भौतिकी विभाग के समस्त शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

दिनांक 24/08/2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन में शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा रक्षाबंधन पर्व के पूर्व अंतरविभागीय मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बी.एड., बीए, बीसीए, बी.एससी. एवं एम.एससी. के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया तथा अपनी कलात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने हाथों पर आकर्षक, सुंदर एवं विविध डिजाइनों की मेहंदी रचाकर अपनी रचनात्मकता और कला-कौशल का परिचय दिया। निर्णायक मंडल के अनुसार प्रतियोगिता में बीसीए तृतीय सेमेस्टर के छात्र भगवान दास ने प्रथम स्थान, एम.एससी. द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा अर्शी सैफी ने द्वितीय स्थान तथा बी.एससी. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा प्रिंसी ने तृतीय स्थान एवं सांत्वना पुरस्कार बी.एड. द्वितीय वर्ष की छात्रा रूबी कुमारी एवं वर्षा सिंह ने प्राप्त किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रो. ऋषि कुमार अग्रवाल, प्रो. चंद्रावती, श्री मयंक शर्मा, डॉ. जागृति सिंह एवं श्रीमती कामिनी अग्रवाल शामिल रहे। इस अवसर पर प्रो. चंद्रावती ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मेहंदी भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनकी कलात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं। प्रो. ऋषि कुमार अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालय में आयोजित सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं तथा विद्यार्थियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करती हैं। इस अवसर पर शिक्षक शिक्षा विभाग प्रभारी डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मक, कलात्मक एवं व्यावहारिक प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धात्मक भावना एवं अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर प्रदान करती हैं। कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. सुनीता गौड़ ने सभी अतिथियों, निर्णायक मंडल, प्राध्यापकों एवं प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग एवं उत्साहपूर्ण सहभागिता से यह प्रतियोगिता सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यक्रम का संचालन बी.एड. विभाग के प्राध्यापक श्री देव स्वरूप गौतम द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री गुरुदत्त शर्मा, डॉ. घनेंद्र कुमार बंसल, श्री पंकज प्रकाश आदि शिक्षक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में उजाला कुमारी, निर्मला, इकरा, प्रगति शर्मा, अंजलि, प्राची चौधरी, पिंकी, शिवानी, हिमांशी एवं वर्षा सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस प्रकार मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन उत्साहपूर्ण, रचनात्मक एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

दिनांक 24/08/2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग द्वारा सेबी (SEBI) निवेशक जागरूकता पहल के संयुक्त तत्वावधान में विद्यार्थियों को वित्तीय रूप से जागरूक एवं सक्षम बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय “वित्तीय साक्षरता सत्र" का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सेबी-स्मार्ट ट्रेनर श्री चंद्रेश गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वित्तीय नियोजन, निवेश के विभिन्न विकल्पों, वित्तीय अनुशासन तथा निवेश संबंधी सावधानियों के प्रति जागरूक करना रहा। मुख्य वक्ता श्री चंद्रेश गुप्ता ने विद्यार्थियों को वित्तीय नियोजन, लक्ष्य आधारित निवेश, स्मार्ट निवेश विकल्प, वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव तथा निवेशकों के अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के संबंध में महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने विद्यार्थियों को निवेश से पहले उचित जानकारी प्राप्त करने, जोखिम को समझने तथा सोच-समझकर वित्तीय निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए वित्तीय साक्षरता अत्यंत आवश्यक है। प्रारंभिक अवस्था से ही बचत, निवेश एवं वित्तीय अनुशासन की समझ विकसित होने से विद्यार्थी अपने भविष्य को अधिक सुरक्षित और सुदृढ़ बना सकते हैं। वाणिज्य विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भुवनेश कुमार ने अतिथि वक्ता एवं उपस्थित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि वित्तीय जागरूकता आज की आधुनिक शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में उपयोगी वित्तीय निर्णय लेने की समझ भी विकसित करनी चाहिए। इस अवसर पर सुश्री बबीता वार्ष्णेय, (Coordinator & HR) ने भी अपनी सहभागिता एवं सहयोग प्रदान किया। उन्होंने वित्तीय जागरूकता को विद्यार्थियों के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने वित्तीय अनुशासन, नियमित बचत तथा जागरूक निवेश के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कु. किश्वर सैफी सहित वाणिज्य संकाय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने सत्र में उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा वित्तीय विषयों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। कार्यक्रम के अंत में अतिथि वक्ता के प्रति आभार डॉ. राजीव कुमार गोयल द्वारा व्यक्त किया गया, जबकि मंच संचालन डॉ. विशाल शर्मा ने किया। कार्यक्रम का सफल आयोजन वाणिज्य विभाग के समन्वित प्रयासों से संपन्न हुआ।

दिनांक 22 अगस्त 2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर के संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती मेरठ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत सात दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का दिनांक 22 अगस्त 2026 को भव्य एवं उत्साहपूर्ण समापन हुआ। शिविर के दौरान प्रतिभागियों को संस्कृत भाषा को सरल एवं व्यवहारिक रूप से बोलने का प्रशिक्षण दिया गया तथा दैनिक जीवन में संस्कृत के प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही बच्चों ने आवश्यक वस्तुओं की संस्कृत में प्रदर्शनी भी आयोजित की जिसमें फल, सब्जी, मसाले एवं खाद्य वस्तुओं को संस्कृत में लिखकर मनोहर रूप में प्रस्तुत किया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री शुभम सिंह, प्राचार्य, आईटीआई अनूपशहर उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति एवं संस्कारों की आधारभूत भाषा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को बोलचाल की भाषा के रूप में अपनाने से नई पीढ़ी का अपनी संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ाव और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने सात दिवसीय शिविर के सफल आयोजन के लिए संस्कृत विभाग एवं संस्कृत भारती को बधाई दी तथा विद्यार्थियों से संस्कृत के निरंतर अध्ययन एवं प्रयोग का आह्वान किया। समारोह के विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कुमार भारद्वाज, प्रधानाचार्य, जेपी संस्कृत विद्यालय ने कहा कि संस्कृत भाषा में ज्ञान का विशाल भंडार निहित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत संभाषण के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि एवं आत्मविश्वास दोनों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखकर दैनिक व्यवहार में लाने की आवश्यकता है। उन्होंने शिविर में प्रतिभाग करने वाले सभी विद्यार्थियों एवं आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में प्रोफेसर चंद्रावती ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्कृत हमारी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत की महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने कहा कि सात दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों ने संस्कृत को बोलने और समझने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से शिविर के बाद भी संस्कृत में निरंतर संवाद करने का आह्वान किया। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ लक्ष्मण सिंह ने सप्त दिवसीय शिविर का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संस्कृत विभाग में कार्यरत डॉक्टर सोहन आर्य ने कार्यक्रम का संचालन किया शिविर के दौरान प्रतिभागियों को संस्कृत में दैनिक जीवन से जुड़े संवाद, परिचय, अभिवादन, प्रश्नोत्तर एवं सामान्य व्यवहार की भाषा का अभ्यास कराया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा संस्कृत में संवाद एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्हें उपस्थित अतिथियों ने सराहा। विद्यार्थियों ने सात दिवसीय कार्यशाला के अंतर्गत प्राप्त अनुभवों को भी साझा किया। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ लक्ष्मण सिंह ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, महाविद्यालय परिवार के प्राध्यापक प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे, डॉक्टर यजवेन्द्र कुमार डॉक्टर सुनीता गौड़ डॉ राधा उपाध्याय, संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में दिनांक 22 अगस्त 2026 को प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन में भूगोल विभाग द्वारा “मधुमक्खियाँ पर्यावरण एवं जैव विविधता के लिए क्यों आवश्यक हैं” विषय पर एक महत्वपूर्ण अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. वीरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे। अपने व्याख्यान में डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने विद्यार्थियों को मधुमक्खियों की पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियाँ केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे परागण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। मधुमक्खियाँ विभिन्न पौधों के बीच परागकणों के स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे पौधों में प्रजनन की प्रक्रिया सुचारु रूप से होती है और अनेक वनस्पति प्रजातियों का अस्तित्व बना रहता है, कृषि उत्पादन में मधुमक्खियों की उपयोगिता, फसलों के परागण, खाद्य श्रृंखला के संतुलन तथा जैव विविधता के संरक्षण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। मधुमक्खियों की उपस्थिति पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। मधुमक्खियों के माध्यम से होने वाला परागण कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य श्रृंखला और आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने में भी सहायक है। उन्होंने विद्यार्थियों को मधुमक्खियों के संरक्षण तथा उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया। इस अवसर पर डॉ. यजवेंद्र कुमार ने कहा कि मधुमक्खियाँ हमारे पर्यावरण और कृषि व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनके संरक्षण के बिना जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने तथा मधुमक्खियों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। भूगोल विभाग प्रभारी श्री निमेश कुमार ने कहा कि मधुमक्खियों का संरक्षण पर्यावरण संरक्षण का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ता जीवों के महत्व को समझते हुए इनके संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. राधा उपाध्यक्ष, श्री अनिल कुमार, डॉ. एन. सी. शर्मा एवं देव स्वरूप गौतम उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर दिनेश कुमार, राज कुमार, सौरभ, काजल कुमारी, वंशिका, मुस्कान, प्राची, सुमन एवं दीपांशी सहित अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 20.08.2026 को डी.पी.बी.एस. महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह के निर्देशन में भौतिकी विभाग के तत्वावधान में अक्षय ऊर्जा दिवस का सहर्ष आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को अक्षय ऊर्जा के महत्व, उसके विभिन्न स्रोतों तथा पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा। इस अवसर पर भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. यजवेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में ऊर्जा की बढ़ती मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा तथा अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा न केवल ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है, बल्कि यह प्रदूषण को कम करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रावती ने बताया कि भारत में हर साल 20 अगस्त को अक्षय ऊर्जा दिवस (Renewable Energy Day) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2004 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा की गई थी। यह दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मदिन की याद में भी मनाया जाता है। आपने छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूक होकर इसके प्रयोग और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऊर्जा संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकता है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को अक्षय ऊर्जा के महत्व, ऊर्जा संरक्षण तथा सतत विकास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गईं। इस अवसर पर भौतिकी विभाग के शिक्षकगण एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन ऊर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के संकल्प के साथ हुआ।

19 अगस्त 2026: डीपीबीएस, अनूपशहर के सभागार में आज हिंदी विभाग एवं भारत स्काउट और गाइड (रोवर/रेंजर इकाई) के संयुक्त तत्वावधान में महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विचार गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर गिरीश कुमार ने कहा कि, "गोस्वामी तुलसीदास जी केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पथ-प्रदर्शक और लोकनायक थे। उनके द्वारा रचित 'श्रीरामचरितमानस' मानव जीवन के हर पहलू—पारिवारिक मर्यादा, सामाजिक समरसता और कर्तव्यबोध को रेखांकित करता है। आज की युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्र से सीख लेकर अपने जीवन को दिशा देनी चाहिए।" स्काउट गाइड प्रभारी डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, "तुलसीदास जी का जीवन और दर्शन 'परहित सरिस धरम नहिं भाई' के सिद्धांत पर आधारित है। यही विचार भारत स्काउट और गाइड की मूल भावना 'सेवा, अनुशासन और समर्पण' का आधार है। हमारे रोवर्स और रेंजर्स को तुलसीदास जी के सेवा भाव को आत्मसात कर समाज के निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।" हिंदी विभाग के डॉ. आलोक तिवारी ने कहा कि, "तुलसीदास जी ने तत्कालीन विषम सामाजिक परिस्थितियों में लोकभाषा अवधी के माध्यम से जन-जन में आशा, भक्ति और नवचेतना का संचार किया। उनका साहित्य कालजयी है और वर्तमान वैश्विक संदर्भ में भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना उस समय था।" कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, स्काउट-गाइड के रोवर्स-रेंजर्स और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और तुलसीदास जी की प्रसिद्ध चौपाइयों व दोहों का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से किया गया तथा अंत में राष्ट्रगान के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 19.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित जागरूकता को समर्पित ग्रीन बुक ‘हरित पुस्तिका’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. गौरव वार्ष्णेय, सह निदेशक, वन विभाग तथा विशिष्ट अतिथि श्री आकाश गोयल, मैनेजर, पंजाब नेशनल बैंक, अनूपशहर शाखा उपस्थित रहे। ग्रीन बुक ‘हरित पुस्तिका’ का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय परिवार में पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता, ऊर्जा बचत तथा जैव विविधता के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। यह पुस्तिका पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने तथा महाविद्यालय परिसर को अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें महाविद्यालय में विद्यमान सभी वृक्षों के बारे में जानकारी दी गई है। इसके संपादक डॉ सत्य प्रकाश, डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ शैलेंद्र कुमार सिंह एवं डॉ हरेंद्र कुमार रहे। मुख्य अतिथि डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए एक पौधे की देखभाल करना आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की नींव रखना है। उन्होंने विद्यार्थियों को "माता भूमि: पुत्रोहम् पृथिव्या:" का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि श्री आकाश गोयल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता के साथ-साथ व्यवहार में परिवर्तन भी आवश्यक है। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों में सहयोग का आश्वासन दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि महाविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ‘हरित पुस्तिका’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी और संकल्प का दस्तावेज है।** उन्होंने विद्यार्थियों से अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

15 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम एवं द्वितीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शपथ कार्यक्रम एवं तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना रहा। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने विद्यार्थियों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय परिवार को राष्ट्र की एकता, अखंडता, संविधान एवं राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति निष्ठा की शपथ दिलाई। उपस्थित सभी सदस्यों ने देश के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी एवं समर्पण के साथ निर्वहन करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि “स्वतंत्रता दिवस हमें देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और बलिदानों का स्मरण कराता है। युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की प्रगति, एकता और अखंडता को मजबूत करने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।” इसके पश्चात महाविद्यालय परिसर से तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय ध्वज हाथों में लेकर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक रैली में सहभागिता की। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने देशभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता से संबंधित नारों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित शपथ एवं तिरंगा रैली विद्यार्थियों में देश के प्रति जिम्मेदारी और सेवा भावना को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्रीय मूल्यों को अपने व्यवहार एवं जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। राष्ट्रीय सेवा योजना द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि “तिरंगा हमारे राष्ट्र के गौरव, सम्मान और एकता का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शपथ एवं तिरंगा रैली जैसे कार्यक्रम युवाओं में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। विद्यार्थियों को स्वतंत्रता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।” कार्यक्रम में प्रो. आर. के. अग्रवाल, डॉ. सोहन आर्य, प्रो. पी. के. त्यागी, डॉ. लक्ष्मण कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। तिरंगा रैली के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह एवं देशभक्ति की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ तथा सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में "विभाजन विभीषिका स्मृति " दिवस के अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जीके सिंह के निर्देशन में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा, संघर्ष एवं बलिदान को याद किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. राधा उपाध्याय ,श्री अनिल कुमार और इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. नरेश चन्द्र ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा उसके सामाजिक एवं मानवीय प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण श्री निमेश कुमार, नरेश चन्द्र आदि उपस्थित रहे एवं विद्यार्थियों ने भी बढ़ चढ़कर भाग लिया अंत में विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का संकल्प लिया गया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में गृह विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता मे प्राचार्य प्रो. जीके सिंह ने भारतीय संस्कृति में मेहंदी का महत्व बताया। मेहंदी, जिसे हिना के नाम से भी जाना जाता है, सकारात्मक भावनाओं और सौभाग्य से जुड़ा एक पेस्ट है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि खास अवसरों पर हाथों में मेहंदी लगाना हमारी प्राचीन संस्कृति है। मेहंदी लगाना भारतीय संस्कृति में शुभ माना जाता है। मांगलिक अवसरों पर भी मेहंदी लगाने की परंपरा है क्योंकि यह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विभाग प्रभारी डॉ. मोहिनी गुप्ता ने कहा कि प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलू को प्रोत्साहित करने के साथ साथ विद्यार्थियों में कौशल का विकास करना और उसकी विविधता को सम्मानित करना है। छात्राओं ने अपने हाथों पर मेहंदी की एक श्रृंखला के माध्यम से अपने कलात्मक डिजाइन प्रदर्शित किए जिसमे कुछ पुराने लेकिन कुछ डिजाइन अनोखे और ट्रेंडी थे। गृह विज्ञान की प्रवक्ता सृष्टि शर्मा ने कहा कि मेहंदी का उपयोग बालों, नाखूनों और कपड़ों को रंगने के लिए भी किया जा सकता है और यह एक पौधे से प्राप्त होती है जो एक गहरा और अस्थायी रंग प्रदान करती है।छात्राओं की मेहंदी को देखते हुए प्रोफेसर चंद्रावती ने बताया कि मेहंदी कई समृद्ध भावनाओं और मान्यताओं के साथ औषधीय जड़ी बूटियों के ज्ञान को एक साथ लाते हुए समृद्ध भारतीय संस्कृति को दर्शाती है। प्रतियोगिता निर्णायक मंडल के रूप में डॉ रेनू चौधरी एवं प्रोफेसर चंद्रावती ने उजाला बी ए द्वितीय वर्ष को प्रथम, माधुरी को द्वितीय एवं अंजली गौतम को तृतीय स्थान पर घोषित किया।

दिनांक 14.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम एवं द्वितीय इकाई के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय परिसर में स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ ‘सेल्फी विद तिरंगा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्यों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ सेल्फी लेकर देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा, “तिरंगा केवल हमारे देश का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण कराता है, जिनके संघर्ष के कारण हम स्वतंत्र भारत में जीवन जी रहे हैं। विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मूल्यों एवं संविधान के प्रति निष्ठावान रहते हुए देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देना चाहिए।” राष्ट्रीय सेवा योजना प्रथम इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा, “हर घर तिरंगा अभियान विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय गौरव की भावना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना केवल उन्हें स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेना भी है। राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।” राष्ट्रीय सेवा योजना द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा, “तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, सम्मान और गौरव का प्रतीक है। ‘सेल्फी विद तिरंगा’ जैसे कार्यक्रम युवाओं को राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान तथा स्वतंत्रता के मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। आज की युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।” कार्यक्रम में प्रो. आर. के. अग्रवाल, डॉ. सोहन आर्य, प्रो. पी. के. त्यागी, डॉ. लक्ष्मण कुमार सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान एवं राष्ट्रप्रेम की भावना को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने तथा राष्ट्रध्वज के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

दिनांक 13.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में वाणिज्य संकाय तथा भारत स्काउट एवं गाइड के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य 'तिरंगा यात्रा' का आयोजन किया गया। देशभक्ति के उत्साह और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत इस यात्रा में कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तिरंगा यात्रा का शुभारंभ प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह ने किया, जिसमें सिर पर तिरंगा टोपी धारण किए विद्यार्थी "भारत माता की जय", "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा" और "वंदे मातरम" के गगनभेदी नारों के साथ आगे बढ़े। पूरी यात्रा के दौरान डीपीबीएस कॉलेज देशभक्ति के रंगों में रंगा नजर आया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने कहा कि "तिरंगा हमारे देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। यह यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं के दिलों में राष्ट्र के प्रति समर्पण, एकता और नागरिक कर्तव्यों की भावना को प्रगाढ़ करने का एक माध्यम है। हर नागरिक को देश की अखंडता बनाए रखने के लिए संकल्पित होना चाहिए।" डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि "स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदानों की बदौलत आज हम आज़ाद फिज़ा में सांस ले रहे हैं। हमारी युवा पीढ़ी को उनके पदचिह्नों पर चलकर देश के विकास में अपना सक्रिय योगदान देना चाहिए।" डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि "भारत स्काउट एवं गाइड और युवाओं की यह पहल समाज में अनुशासन, देशभक्ति और भ्रातृत्व की भावना का संचार करती है। ऐसे आयोजन राष्ट्रीय चेतना को जीवित रखते हैं।" डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि "तिरंगा हमें विविधता में एकता की सीख देता है। विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कल्याण के कार्यों में करना चाहिए।" डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय पर्व और ध्वज हमें हमारे दायित्वों की याद दिलाते हैं। युवाओं में देशप्रेम की यह ऊर्जा ही आने वाले समय में एक सशक्त और समृद्ध भारत की नींव रखेगी।" सफलतापूर्वक हुआ आयोजन: यात्रा के समापन पर प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए वाणिज्य संकाय के डा भुवनेश कुमार, डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी , भारत स्काउट एवं गाइड के प्रभारियों तथा सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम अनुशासन, उल्लास और राष्ट्रप्रेम की अनुपम छटा के साथ संपन्न हुआ।

दिनांक 07.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में पुस्तक विमोचन समारोह एवं राष्ट्रीय करघा दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुस्तक विमोचन समारोह में अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष श्रीमती कामिनी अग्रवाल द्वारा लिखित "English prose and Writing Skills" पुस्तक का विमोचन किया गया। इस पुस्तक विमोचन समारोह की मुख्य अतिथि डॉक्टर दिव्या वाला पाठक, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ इंग्लिश, अमर सिंह कॉलेज लखावटी रहीं । । इस पुस्तक की लेखिका श्रीमती कामिनी अग्रवाल ने बताया के इस किताब को लिखने की प्रेरणा महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह जी से प्राप्त हुई। मैंने इस किताब में राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लागू किए गए बीए प्रथम वर्ष के नए पाठ्यक्रम को पूर्णतया कवर किया है। इस किताब में थ्योरी के साथ-साथ बहुविकल्पीय प्रश्न भी दिए गए हैं जो कि विद्यार्थियों को परीक्षा में सहायता प्रदान करेंगे। इसके पश्चात कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ दिव्या बाला पाठक ने बताया की कामिनी अग्रवाल मेरी रिसर्च स्कॉलर हैं और इतना अच्छा काम कर रही हैं। मैं उसके लिए उन्हें शुभकामनाएं प्रदान करती हूं। अपने पुस्तक की विशेषता बताते हुए कहा कि इस पुस्तक में लेखिका ने पॉइंट टू पॉइंट पाठ्यक्रम पर अपना लेखन कार्य किया है। पुस्तक विमोचन समारोह में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने लेखिका श्रीमती कामिनी अग्रवाल को शुभकामनाएं देते हुए उनकी मेहनत की प्रशंसा की एवं पुस्तक के विषय में बताते हुए कहा कि लेखिका ने पुस्तक में अत्यंत सरल तरीके से विषयों को स्पष्ट किया है सभी विद्यार्थी इस पुस्तक को पढ़ें। इस कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर तरुण श्रीवास्तव ने किया। महाविद्यालय के द्वितीय कार्यक्रम राष्ट्रीय करघा दिवस कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉक्टर मोहनी गुप्ता द्वारा किया गया। डॉ मोहिनी गुप्ता ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के हथकरघा बुनकरों के कौशल को सम्मान देना और छात्राओं को इस दिवस से अवगत कराना है उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 7 अगस्त 2015 को पहली बार की थी। 2026 के 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का मुख्य फोकस "बुनकरों का सम्मान, परंपराओं का नवीनीकरण, क्षितिज का विस्तार" और 'Weaving Innovation' (हैंडलूम हैकाथॉन) जैसी पहलों पर है।गृह विज्ञान की अध्यापक सृष्टि शर्मा ने हथकरघा उद्योग के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि कृषि के बाद यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह ने छात्राओं के ज्ञानवर्धक प्रस्तुतिकरण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों के प्रति सम्मान तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं। इन कार्यक्रमों में महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर चंद्रावती प्रोफेसर आरके अग्रवाल डॉक्टर रेनू चौधरी आदि सभी सम्मानित प्राध्यापक उपस्थित रहे ।

7 अगस्त 2026: डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग में शनिवार को "बैंकिंग क्षेत्र में भविष्य, चुनौतियाँ और समाधान" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, आधुनिक तकनीकों और भविष्य में रोजगार के अवसरों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एक्सिस बैंक अनूपशहर के शाखा प्रबंधक चंचल शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, "आज का बैंकिंग क्षेत्र तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एआई (AI) और साइबर सुरक्षा जैसी नई तकनीकों के आने से जहाँ चुनौतियाँ बढ़ी हैं, वहीं युवाओं के लिए इसमें अपार संभावनाएँ भी बनी हैं। बैंकिंग में करियर बनाने के लिए केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक समझ, निरंतर सीखने की इच्छा और डिजिटल कौशल का होना बेहद जरूरी है।" इसी क्रम में एक्सिस बैंक के कैशियर सुधीर कुमार सिंह ने बैंक की व्यावहारिक कार्यप्रणाली और वित्तीय लेनदेन की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "डिजिटल बैंकिंग के इस दौर में सुरक्षा और ग्राहकों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव और सुरक्षित बैंकिंग पद्धतियों के प्रति जागरूक होना चाहिए।" डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं को समझने का अवसर मिलता है, जो उनके पेशेवर जीवन में बेहद मददगार साबित होगा।

दिनांक 07.08.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय अनूपशहर में महाविद्यालय प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत डिप्लोमा इन मेडिकल ड्रेसर और डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन दो कोर्स का उद्घाटन किया गया।

दिनांक 06 .08 .2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह की अध्यक्षता में अंग्रेजी विभाग द्वारा 'स्वयं (SWAYAM) पोर्टल' विषय पर एक जागरूकता एवं प्रशिक्षण व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंग्रेजी विभागाध्यक्ष श्रीमती कामिनी अग्रवाल ने प्राध्यापकों को 'स्वयं' पोर्टल की उपयोगिता, संचालन प्रक्रिया तथा इसके माध्यम से उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि यह पोर्टल शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी विषयगत दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ अतिरिक्त ज्ञान एवं कौशल भी अर्जित कर सकते हैं, जबकि शिक्षक अपने अध्यापन को अधिक प्रभावी और अद्यतन बना सकते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी प्राध्यापकों से 'स्वयं' पोर्टल का अधिकाधिक उपयोग करने तथा विद्यार्थियों को भी इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों का समुचित उपयोग विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास और आत्मनिर्भरता को नई दिशा प्रदान करेगा। कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों ने भी 'स्वयं' पोर्टल के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए इसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत उपयोगी पहल बताया। इसके अतिरिक्त महाविद्यालय में स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत डिप्लोमा इन मेडिकल ड्रेसर और डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन दो पाठ्यक्रमों का शुभारंभ एवं बैंकिंग समस्या समाधान विषय पर एक गोष्ठी का भी आयोजन हुआ।

5 अगस्त 2026: डी.पी.बी.एस. कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में वाणिज्य विभाग ने आज "व्यावहारिक जीवन में केंद्रीय माप का उपयोग" विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सांख्यिकी के व्यावहारिक महत्त्व और दैनिक जीवन में इसके अनुप्रयोगों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सांख्यिकी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पी. के. त्यागी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में प्रो. त्यागी ने कहा कि: "केंद्रीय प्रवृत्ति के माप (माध्य, माध्यिका और बहुलक) केवल किताबों और आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये हमारे दैनिक जीवन, व्यापारिक निर्णयों और आर्थिक नीतियों के निर्धारण में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं। सही आंकड़ों का सटीक विश्लेषण ही बेहतर प्रबंधन और निर्णय क्षमता का आधार बनता है।" कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. तरुण श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक समय में डेटा (Data) की समझ विद्यार्थियों के व्यावसायिक भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। डॉ. भुवनेश कुमार ने कहा कि सांख्यिकीय पद्धतियों का सही ज्ञान विद्यार्थियों को अनुसंधान और व्यापार के नए अवसरों को समझने में सक्षम बनाता है। डॉ. विशाल शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वाणिज्य के क्षेत्र में केंद्रीय मापों का उपयोग बाजार के रुझानों को समझने और वित्तीय जोखिमों को कम करने में सहायक होता है। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के डा भुवनेश कुमार, डा तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 04-08-26 को सांख्यिकी विभाग के तत्वावधान में "पी. सी. महालनोबिस का प्रमुख योगदान एवं उपादेयता" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने की।प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पी. सी. महालनोबिस ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना कर देश को एक सुदृढ़ सांख्यिकीय ढांचा दिया। देश के आर्थिक नियोजन और औद्योगिक विकास में उनके विचार आज भी मार्गदर्शक हैं। मुख्य वक्ता सांख्यिकी विभाग के रिटा. प्रोफेसर पी. के. त्यागी ने महालनोबिस के गणितीय सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 'महालनोबिस दूरी' (Mahalanobis Distance) और द्वितीय पंचवर्षीय योजना के उनके प्रसिद्ध मॉडल की चर्चा करते हुए बताया कि आधुनिक डेटा साइंस में उनके सिद्धांत कितने प्रासंगिक हैं। विभाग अध्यक्ष सांख्यिकी, प्रोफेसर चन्द्रावती ने सांख्यिकी की व्यावहारिक उपादेयता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि सटीक आंकड़ों के बिना सही नीति निर्माण असंभव है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे श्री नरेंद्र रंजन एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

दिनांक 03 अगस्त 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग द्वारा "वाणिज्य दिवस (Commerce Day)" का गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन करते हुए वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि वाणिज्य दिवस का उद्देश्य विद्यार्थियों में वाणिज्य शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना, वित्तीय एवं व्यावसायिक समझ का विकास करना तथा उनमें नेतृत्व क्षमता, नवाचार, उद्यमिता और व्यावसायिक नैतिकता जैसे गुणों का संवर्धन करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक एवं डिजिटल युग में वाणिज्य शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार है। कार्यक्रम का संचालन कर रहे सहायक आचार्य डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि वाणिज्य शिक्षा विद्यार्थियों में व्यावहारिक ज्ञान, तार्किक चिंतन तथा प्रभावी निर्णय क्षमता का विकास करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को बदलते व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन रखने तथा कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। सहायक आचार्य डॉ. राजीव गोयल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में वाणिज्य शिक्षा रोजगार, उद्यमिता एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रमुख आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार, अनुसंधान तथा व्यावसायिक अवसरों के प्रति सजग एवं जागरूक रहने का आह्वान किया। सहायक आचार्य डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा प्रभावी अभिव्यक्ति कौशल का विकास करती हैं और उन्हें व्यवहारिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। अकादमिक एसोसिएट किश्वर सैफी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वाणिज्य दिवस जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, विषय की गहन समझ विकसित करने तथा नवीन जानकारियाँ प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए वाणिज्य शिक्षा के महत्व, भारतीय अर्थव्यवस्था, उद्यमिता, बैंकिंग, लेखांकन, कराधान, जीएसटी, डिजिटल वित्त तथा समसामयिक आर्थिक विषयों पर ज्ञानवर्धक गतिविधियों एवं संवाद का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ सक्रिय सहभागिता करते हुए विषय के प्रति अपनी गहरी रुचि, समझ एवं सीखने की प्रतिबद्धता का प्रभावशाली परिचय दिया। विद्यार्थी बॉबी, भूमिका शर्मा, आकाश, शना, गीतांजलि यादव, कुणाल, पूजा, काजल चौहान एवं नेहा सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विषय के प्रति उनकी रुचि बढ़ती है, नवीन जानकारियाँ प्राप्त होती हैं तथा आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों के नियमित आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की गई तथा वाणिज्य शिक्षा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के आर्थिक विकास में सार्थक एवं सकारात्मक योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

दिनांक 03. 08. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह के निर्देशन में आज भारतीय रसायन विज्ञान के जनक आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय की जयंती श्रद्धा, सम्मान एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान वैज्ञानिक के प्रेरणादायी व्यक्तित्व एवं कृतित्व से परिचित कराना तथा उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की भावना एवं नवाचार के प्रति रुचि विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर डॉ. राधा उपाध्याय ने सभी अतिथियों एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि महान वैज्ञानिकों का जीवन हमें परिश्रम, अनुशासन, समर्पण तथा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता है। मुख्य वक्ता डॉ. यजवेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय भारतीय रसायन विज्ञान के जनक होने के साथ-साथ एक महान शिक्षाविद, वैज्ञानिक एवं समाजसेवी भी थे। उन्होंने स्वदेशी विज्ञान को नई दिशा प्रदान की तथा अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश के वैज्ञानिक विकास में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए शोध, नवाचार एवं ज्ञानार्जन के प्रति सदैव समर्पित रहें तथा विज्ञान को मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाएं। इस अवसर पर डॉ. जी. के. बंसल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को अधिक सरल, सुरक्षित एवं समृद्ध बनाना है। डॉ. जागृति सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय का जीवन संघर्ष, सादगी, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र समर्पण का अनुपम उदाहरण है। इस अवसर पर दीक्षा शर्मा, तनिष्का, आयुष, तनिष्क, मयंक, प्रवीन, दीपांशी, रोहित, रुकसार आदि सभी छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे तथा उन्होंने कार्यक्रम का लाभ प्राप्त किया।

दिनांक 31. 07. 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में हिंदी विभाग द्वारा हिंदी साहित्य के महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस अवसर पर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज की वास्तविकताओं का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने अपने उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से किसान, श्रमिक, दलित, महिला तथा वंचित वर्ग की पीड़ा को अत्यंत संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ अभिव्यक्त किया। डॉ. तिवारी ने विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य का अध्ययन कर सामाजिक संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों तथा मानवीय दृष्टि को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की तथा प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

दिनांक 31.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में गणित विभाग के तत्वावधान में महान स्विस गणितज्ञ गैब्रियल क्रैमर (Gabriel Cramer) की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महान गणितज्ञों के जीवन एवं उनके गणितीय योगदान से परिचित कराना तथा गणित के प्रति उनकी रुचि एवं शोध भावना को प्रोत्साहित करना था। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गैब्रियल क्रैमर के जीवन, उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा गणित के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को क्रैमर नियम (Cramer's Rule) की अवधारणा, उसके सिद्धांत तथा रैखिक समीकरणों के हल में उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में बताया गया। साथ ही आधुनिक विज्ञान, अभियांत्रिकी, कंप्यूटर विज्ञान तथा डेटा विश्लेषण में क्रैमर के योगदान की प्रासंगिकता पर भी चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का संयोजन गणित विभाग के सहायक आचार्य डॉ. हरेंद्र कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को गैब्रियल क्रैमर के जीवन एवं गणितीय योगदान से परिचित कराते हुए बताया कि क्रैमर नियम (Cramer's Rule) रैखिक समीकरणों के हल की एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसका उपयोग गणित के साथ-साथ अभियांत्रिकी, भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान तथा डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से किया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को गणितीय अवधारणाओं को केवल सूत्रों तक सीमित न रखकर उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझने तथा अनुसंधान के क्षेत्र में नवीन विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गणित विभाग के प्रोफेसर आर. के. अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गैब्रियल क्रैमर के व्यक्तित्व, उनकी विद्वत्ता तथा गणित के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महान गणितज्ञों का जीवन हमें जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, अनुशासन एवं निरंतर अध्ययन की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे गणित को केवल एक विषय के रूप में न देखकर समस्या-समाधान की कला तथा वैज्ञानिक सोच के आधार के रूप में अपनाएँ, जिससे वे भविष्य में उत्कृष्ट शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकें। इस कार्यक्रम में , प्रोफेसर चंद्रावती, प्रोफेसर यजवेंद्र कुमार, प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे, सहित अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।

दिनांक 29.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में "साइबर सुरक्षा: चुनौतियाँ और समाधान" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बीसीए विभाग के अध्यक्ष पंकज गुप्ता रहे। उन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराधों के बढ़ते खतरों, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों और डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण नियमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित इंटरनेट बैंकिंग, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा मजबूत पासवर्ड प्रबंधन के व्यावहारिक टिप्स दिए। व्याख्यान के दौरान महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. भुवनेश कुमार एवं डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने मुख्य वक्ता पंकज गुप्ता को महाविद्यालय का पटका पहनाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना प्रत्येक नागरिक के लिए बेहद आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया की चुनौतियों के प्रति सतर्क और सक्षम बनाते हैं। आयोजन में वाणिज्य विभाग के डॉ भुवनेश कुमार, डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।

दिनांक 28.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के नेतृत्व में महाविद्यालय के प्रतिनिधि मंडल ने उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय के नव-नियुक्त निदेशक प्रोफेसर डॉ मोनिका सिंह से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें नवीन दायित्व ग्रहण करने पर पुष्पगुच्छ प्रदान करके हुए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा एवं गति प्राप्त होगी। भेंट के दौरान प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने महाविद्यालय से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण समस्याओं एवं आवश्यकताओं से निदेशक महोदय को अवगत कराया। उन्होंने महाविद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के लिए रिक्त पदों पर नवीन नियुक्तियाँ किए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। साथ ही, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से संबंधित अनुदान (ग्रांट) एवं अन्य लंबित वित्तीय विषयों के शीघ्र एवं समुचित समाधान के संबंध में भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, विद्यार्थियों के हितों तथा संस्थान के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी निदेशक महोदय का ध्यान आकृष्ट कराया। निदेशक महोदय ने महाविद्यालय की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को गंभीरतापूर्वक सुना तथा उनके यथोचित एवं सकारात्मक समाधान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर प्रोफेसर पी.के. त्यागी एवं डॉ. दीक्षित कुमार भी उपस्थित रहे। दोनों शिक्षाविदों ने भी नव-नियुक्त निदेशक महोदय को नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं तथा उच्च शिक्षा के विकास एवं महाविद्यालयों से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने विचार साझा किए। यह शिष्टाचार भेंट अत्यंत सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई। महाविद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि निदेशक महोदय के सहयोग एवं मार्गदर्शन से महाविद्यालय की विभिन्न समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा तथा संस्थान के शैक्षणिक एवं आधारभूत विकास को नई गति प्राप्त होगी।

दिनांक 24 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों ने प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल निर्देशन में 'अग्रवाल वुड प्रोडक्ट्स' फैक्ट्री का शैक्षणिक व औद्योगिक भ्रमण किया। इस शैक्षणिक दौरे का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक औद्योगिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना था। फैक्ट्री आगमन पर 'अग्रवाल वुड प्रोडक्ट्स' के मालिक श्री सुनील गुप्ता व अनंत जिंदल ने छात्रों का स्वागत किया और अपनी कंपनी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी यह इकाई प्लाईवुड, ब्लॉक बोर्ड और फिल्म-फेस्ड प्लाईवुड के निर्माण में माहिर है। निर्माण प्रक्रिया को समझाते हुए श्री अनंत जिंदल ने बताया कि प्लाईवुड एक 'इंजीनियर्ड वुड' (Engineered Wood) है। इसे लकड़ी की पतली परतों—जिन्हें विनियर (Veneer) कहा जाता है—को आपस में चिपकाकर तैयार किया जाता है। प्लाईवुड को मजबूती और स्थायित्व देने के लिए विनियर की परतों को एक-दूसरे के विपरीत दिशा (अल्टरनेट ग्रेन डायरेक्शन) में रखा जाता है। उन्होंने प्लाईवुड निर्माण के प्रमुख चरणों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्राचार्य प्रो०जी के सिंह ने छात्रों की शैक्षिक भ्रमण से होने वाले लाभ को बताया और इन गतिविधियों में बढ़ चढ़ का भाग लेना जरूरी बताया। वाणिज्य विभाग के आचार्य डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक भ्रमण से छात्रों को उद्योग जगत की वास्तविक कार्यप्रणाली और उत्पादन प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है, जो उनके शैक्षणिक व व्यावहारिक विकास के लिए बेहद आवश्यक है। डॉ विशाल शर्मा ने कहा कि वाणिज्य विभाग इस प्रकार की व्यवहारिक गतिविधियों को अनिवार्य रूप से करता है। इस औद्योगिक दौरे में प्रो पी के त्यागी,डॉ तरुण श्रीवास्तव, डॉ राजीव गोयल, डॉ विशाल शर्मासदस्यों सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 18 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर के रसायन विज्ञान विभाग में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी.के. सिंह के निर्देशन में विषय : "दैनिक जीवन की अदृश्य रीढ़: पॉलिमर" विषय पर एक दिवसीय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा, महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज अमीनाबाद, लखनऊ ने छात्र छात्राओं को बताया कि पॉलिमर ऐसे विशाल अणु हैं, जो छोटे-छोटे अणुओं के आपस में जुड़ने से बनते हैं। उन्होंने कहा कि पॉलिमर आधुनिक जीवन की अदृश्य रीढ़ हैं क्योंकि घर में उपयोग होने वाले प्लास्टिक के बर्तन, पानी की बोतलें, पैकेजिंग सामग्री, कपड़े, जूते, रबर, पेंट, चिपकने वाले पदार्थ, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, वाहन तथा चिकित्सा उपकरणों तक में पॉलिमरों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने प्राकृतिक पॉलिमरों जैसे सेल्यूलोज़, स्टार्च, रेशम, ऊन तथा कृत्रिम पॉलिमरों जैसे पॉलीएथिलीन, पीवीसी, नायलॉन और टेफ्लॉन के उदाहरण देकर उनके गुण एवं उपयोग समझाए। साथ ही उन्होंने बताया कि हल्के वजन, मजबूती, टिकाऊपन, लचीलापन तथा कम लागत के कारण पॉलिमरों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। अंत में उन्होंने प्लास्टिक के दुष्प्रभावों से भी अवगत कराते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से विज्ञान एवं अनुसंधान के माध्यम से ऐसे नवीन पॉलिमरों के विकास में योगदान देने का आह्वान किया, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बना सकें। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो चंद्रावती ने विद्यार्थियों को पॉलिमर के प्रमुख लाभ बताते हुए कहा कि ये हल्के एवं मजबूत होते हैं। जंग एवं रसायनों से प्रभावित नहीं होते।कम लागत में बड़े पैमाने पर बनाए जा सकते हैं। विभिन्न आकार एवं रंगों में आसानी से ढाले जा सकते हैं।विद्युत एवं ऊष्मा के अच्छे कुचालक होते हैं।चिकित्सा और औद्योगिक क्षेत्रों में अत्यंत उपयोगी हैं। लेकिन पॉलिमर से लाभ के साथ साथ इससे जुड़ी चुनौतियाँ भी है क्योंकि जहाँ पॉलिमर ने मानव जीवन को सरल बनाया है, वहीं इनके अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं। जैसे प्लास्टिक कचरे का बढ़ना। जैव-अवक्रमण में अत्यधिक समय लगना। जल एवं भूमि प्रदूषण,समुद्री जीवों एवं वन्यजीवों को नुकसान एवं माइक्रोप्लास्टिक के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आदि। उन्होंने कहा कि भविष्य में सतत विकास के लिए आवश्यक है कि हम पॉलिमर का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करें, उनके पुनर्चक्रण को बढ़ावा दें तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाएँ। कार्यक्रम के इस अवसर पर प्रोफेसर आरके अग्रवाल, डॉ यजवेंद्र कुमार,डॉ लक्ष्मण सिंह, डॉ. जागृति सिंह, सुनील कुमार और रसायन विज्ञान के सभी छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 17 जुलाई 2026 को डीपीबीएस कॉलेज, अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह की अध्यक्षता में शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा "Importance of Physical Education in Modern Era" (आधुनिक युग में शारीरिक शिक्षा का महत्व) विषय पर एक प्रेरणादायी अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में शारीरिक शिक्षा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को रेखांकित करना था। कार्यक्रम में डी एन कॉलेज गुलावटी के शारीरिक शिक्षा विभाग के प्राध्यापक डॉ. नवीन तोमर ने मुख्य वक्ता (Resource Person) के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों, मानसिक तनाव एवं शारीरिक निष्क्रियता के दौर में नियमित व्यायाम, खेलकूद और योग प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से खेलों में सक्रिय भागीदारी करने तथा अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और सकारात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया। इसी क्रम में उन्होंने डायबिटीज से बचाव के विषय में भी सारगर्भित जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जी. के. सिंह ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण भी है। शारीरिक शिक्षा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, अनुशासन, सहनशीलता तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास करती है। कार्यक्रम का संचालन शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो सीमांत कुमार दुबे द्वारा किया गया। अंत में विभाग की ओर से मुख्य अतिथि का स्मृति-चिह्न एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया तथा डॉ लक्ष्मण सिंह द्वारा उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में प्रो आर के अग्रवाल,प्रो चन्द्रावती, डॉ यजवेंद्र कुमार एवं महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे, जिन्होंने व्याख्यान से प्रेरणा प्राप्त की।

दिनांक 15.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में 41 यूपी बटालियन एनसीसी, बुलंदशहर की कमांडिंग ऑफिसर कर्नल प्रियदर्शिनी चौधरी के निर्देशन में विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर डी.पी.बी.एस. कॉलेज, अनूपशहर की राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) इकाई द्वारा युवाओं में कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य के संदेश के साथ हुआ। इस अवसर पर एनसीसी अधिकारी कैप्टन यजवेन्द्र कुमार ने "युवा कौशल एवं राष्ट्र निर्माण" विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, प्रभावी संचार, टीम वर्क, समस्या समाधान एवं व्यवहारिक कौशल का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एनसीसी युवाओं को एक जिम्मेदार, अनुशासित एवं राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करती है। कार्यक्रम में बीसीए विभागाध्यक्ष श्री पंकज गुप्ता ने डिजिटल कौशल, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा रोजगारोन्मुखी तकनीकी दक्षताओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप स्वयं को निरंतर अपडेट रखने एवं नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में डिजिटल कौशल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। कार्यक्रम के दौरान एनसीसी कैडेटों एवं विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व, संचार कौशल तथा रोजगारपरक दक्षताओं के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने अपने कौशलों का निरंतर विकास करने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेटों एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अंत में सभी उपस्थित जनों ने विश्व युवा कौशल दिवस के उद्देश्य को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के अनेक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 15.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय में प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के निर्देशन में स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में श्रद्धा एवं गरिमामय वातावरण में हवन-पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय श्री दुर्गा प्रसाद जी एवं स्वर्गीय श्री बलजीत सिंह जी के चित्रों पर पुष्पार्पण एवं श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने संस्थापकों के आदर्शों का स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसमें महाविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने सहभागिता कर महाविद्यालय की निरंतर उन्नति, विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य तथा समाज के कल्याण की कामना क करते हुए आहुति प्रदान की। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि डीपीबीएस महाविद्यालय की स्थापना शिक्षा, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के उच्च आदर्शों को स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने कहा कि संस्थापकों के आदर्श, त्याग एवं दूरदर्शी सोच ही महाविद्यालय की प्रेरणा हैं तथा हम सभी का दायित्व है कि इन मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण प्रदान करें। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय प्रबंध समिति के आदरणीय श्री जयप्रकाश गौड़ जी ने अपने उद्बोधन में संस्थापकों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि डीपीबीएस महाविद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अनुशासन, परिश्रम एवं समर्पण की भावना के साथ महाविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में अपना योगदान दें।कार्यक्रम का समापन सभी उपस्थितजनों द्वारा महाविद्यालय की निरंतर प्रगति एवं राष्ट्र की समृद्धि की मंगलकामना के साथ हुआ। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री अजय गर्ग जी, उपाध्यक्ष श्री सुनील कुमार गुप्ता जी, संस्थापक सदस्य श्री सेवक चंद्र गुप्ता जी, श्रीमती नीना चतुर्वेदी, श्रीमती शशिबाला पंत आदि सम्मान्य अतिथि एवं महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।

दिनांक 14.07.2026 को डीपीबीएस महाविद्यालय, अनूपशहर के संस्कृत विभाग द्वारा एक गरिमामय अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह के संरक्षण एवं निर्देशन में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र, पूर्व अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ तथा आचार्य, संस्कृत विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और जीवन-दर्शन की आधारशिला है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत तथा अन्य शास्त्रीय ग्रंथों में निहित ज्ञान आज भी मानवता के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्कृत के अध्ययन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर इसे जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में संस्कृत के अध्ययन एवं शोध के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं और युवा पीढ़ी को इस दिशा में आगे बढ़कर भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने कहा कि अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास का प्रभावी माध्यम हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को विषय के विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद का अवसर प्रदान करते हैं, जिससे उनकी ज्ञान-दृष्टि व्यापक होती है। उन्होंने संस्कृत विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा, जिससे विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता का अकादमिक वातावरण उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता से विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने सरल एवं सारगर्भित उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उपस्थित विद्यार्थियों ने व्याख्यान को अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणास्पद बताया। अंत में संस्कृत विभाग की ओर से मुख्य अतिथि का स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मण सिंह ने आभार ज्ञापित करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सोहन आर्य ने किया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

दिनांक 12.07.2026को उत्तर प्रदेश सरकार के "एक पेड़ माँ के नाम" बृहद् वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत डी.पी.बी.एस. महाविद्यालय, अनूपशहर में आज प्राचार्य प्रोफेसर जी. के. सिंह के कुशल निर्देशन में वृहद् स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर, मस्तराम घाट एवं अन्य निर्धारित स्थलों पर लगभग 1200 पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वयन डॉ. यजवेन्द्र कुमार के मार्गदर्शन एवं देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभियान के अंतर्गत *आम, जामुन, अमरूद, सहजन तथा कंजी* सहित विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं पर्यावरण हितैषी पौधे लगाए गए। इन पौधों का उद्देश्य केवल हरित आवरण बढ़ाना ही नहीं, बल्कि जैव विविधता का संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण तथा भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर का सृजन भी है। इस अवसर पर डॉ. यजवेन्द्र कुमार ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन के आधार हैं। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मातृत्व के सम्मान, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता तथा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का संदेश भी देता है। उन्होंने सभी से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल एवं संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। डॉ.चन्द्रावती प्रोफेसर रसायन विज्ञान ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब प्रत्येक पौधे का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी शिक्षकगण, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों से पौधों की नियमित देखभाल करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने का आग्रह किया। महाविद्यालय की तरफ से विद्यार्थियों को भी बहुत पौध दी गई तथा उसे अपने घर में लगाकर उसके संरक्षण करने का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। सभी प्रतिभागियों ने इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी सुरक्षा का संकल्प व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर पी.के. त्यागी, प्रोफेसर आर.के. अग्रवाल, प्रोफेसर चंद्रावती, प्रोफेसर सीमांत कुमार दुबे, डॉ लक्ष्मण सिंह डॉक्टर पंकज गुप्ता, डॉक्टर भुवनेश कुमार आदि समस्त प्राध्यापक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने पूर्ण सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

दिनांक 11.07.2026 को डीपीबीएस कॉलेज अनूपशहर में प्राचार्य प्रोफेसर जी के सिंह के निर्देशन में आज विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर वाणिज्य विभाग और भारत स्काउट गाइड के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने बढ़ती जनसंख्या के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम के वाणिज्य विभाग के डॉ. भुवनेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा, "तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती है। सीमित संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण बेरोजगारी, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। यदि हमें एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है, तो जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।" इसके पश्चात, डॉ. तरुण श्रीवास्तव ने कहा, "जनसंख्या वृद्धि केवल एक संख्यात्मक समस्या नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध मानव संसाधन के प्रबंधन से है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी विशाल युवा आबादी को कुशल और शिक्षित बनाएं। यदि हम जनसंख्या को 'लायबिलिटी' (बोझ) के बजाय 'असेट' (पूंजी) में बदलने में सफल रहे, तो देश का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल सकता है।" कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ विशाल शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, "बढ़ती आबादी का सीधा असर हमारे पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। जल, जमीन और स्वच्छ हवा की कमी भविष्य के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है। विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य तभी सफल होगा जब समाज का प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवा वर्ग, छोटे परिवार के महत्व को समझेगा और जागरूकता फैलाने में अपनी भागीदारी निभाएगा।" संगोष्ठी में वाणिज्य विभाग केडॉ भुवनेश कुमार , डा तरुण श्रीवास्तव, डॉ विशाल शर्मा, किश्वर कुमारी व अन्य समस्त प्राध्यापकों सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

दिनांक 09.07.2026 को डीपीएबीएस पीजी कॉलेज में आज 'सांख्यिकी में विद्यार्थियों की सफलता के सीक्रेट तथ्य और सुझाव' विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एनएएस कॉलेज, मेरठ के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विवेक त्यागी रहे।अपने संबोधन में प्रोफेसर विवेक त्यागी ने विद्यार्थियों को सांख्यिकी के गूढ़ सिद्धांतों को सरल तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक युग में कैरियर निर्माण का सबसे मजबूत स्तंभ है। उन्होंने डेटा एनालिसिस, रिसर्च और सरकारी क्षेत्रों में सांख्यिकी की बढ़ती मांग को रेखांकित करते हुए सफलता के कई व्यावहारिक टिप्स और सीक्रेट्स साझा किए। इस अवसर पर कॉलेज के सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी.के. त्यागी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बौद्धिक व्याख्यान विद्यार्थियों के विषय के प्रति दृष्टिकोण को बदलते हैं और उनमें तार्किक क्षमता का विकास करते हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रोफेसर जी.के. सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि कॉलेज विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विषय में एकाग्रता और निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी है।व्याख्यान में कॉलेज के समस्त प्राध्यापक और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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